कक्षा ९ हिंदी · पहली इकाई

५. जूलिया

अंतोन चेखव — संजाल, कारण लिखिए, भाषा बिंदु (विरामचिह्न), मौलिक सृजन और पाठ के आँगन में (स्वाध्याय) के सभी प्रश्नों के उत्तर।

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एकांकी का परिचय : प्रस्तुत एकांकी 'जूलिया' महान रूसी साहित्यकार अंतोन चेखव द्वारा रचित है। इसमें एक शोषक गृहस्वामी और एक दब्बू सेविका (गवर्नेस) के माध्यम से समाज में व्याप्त शोषण को दर्शाया गया है। रचनाकार ने संदेश दिया है कि हमें दब्बूपन त्यागकर अपने अधिकारों और न्याय के लिए सजग तथा संघर्षशील होना चाहिए।

पाठ के आँगन में (संपूर्ण स्वाध्याय)

१सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए :-

(क) संजाल : जूलिया के मन के भाव दर्शाने वाले स्वर

दबे स्वर में
विनीत स्वर में
रोते स्वर में / रुआँसी होकर
भयभीत स्वर में / काँपती आवाज में

(ख) ऐसे प्रश्न तैयार कीजिए जिनके उत्तर निम्नलिखित शब्द हों :

  • (१) वान्या : जूलिया ने कोल्या के बीमार होने पर सिर्फ किसे पढ़ाया था?
  • (२) रूबल : रूस देश की मुद्रा (चलन) क्या है?
२पाठ में प्रयुक्त अंकों का उपयोग करके मुहावरे लिखिए।

पाठ में प्रयुक्त कुछ अंक जैसे— एक, दो, तीन, चार, पाँच, नौ, दस, ग्यारह आदि हैं। इनसे बने मुहावरे निम्नलिखित हैं:

  • एक और एक ग्यारह होना (संगठन में शक्ति होना)।
  • नौ दो ग्यारह होना (भाग जाना)।
  • पाँचों उँगलियाँ घी में होना (सब ओर से लाभ ही लाभ होना)।
  • चार चाँद लगाना (शोभा बढ़ाना)।
  • तीन-तेरह होना (तितर-बितर होना)।
३कई बार अज्ञान के कारण गरीबों को ठगा जाता है यह देखकर मेरे मन में विचार आए...

समाज में अशिक्षा और अज्ञानता के कारण गरीबों और सीधे-सादे लोगों का शोषण अक्सर देखने को मिलता है। जब मैं किसी गरीब मजदूर या अनपढ़ व्यक्ति को किसी चालाक साहूकार या मालिक द्वारा ठगे जाते देखता हूँ, तो मेरे मन में गहरी पीड़ा और क्षोभ उत्पन्न होता है। मुझे लगता है कि यह समाज की विडंबना है जहाँ इंसानियत से ज्यादा पैसे और स्वार्थ को महत्त्व दिया जाता है।

मेरे मन में यह विचार आता है कि शिक्षा ही वह अस्त्र है जिससे इस शोषण को रोका जा सकता है। जब तक गरीब और मजदूर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक कुछ स्वार्थी लोग उनका फायदा उठाते रहेंगे। हमें समाज में ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जहाँ न्याय सभी के लिए समान हो, और कोई भी व्यक्ति किसी की मजबूरी या अज्ञानता का अनुचित लाभ न उठा सके।

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पठित गद्यांश पर आधारित कृतियाँ

१संजाल पूर्ण कीजिए : गद्यांश में आया संसार
कठोर क्रूर निर्मम हृदयहीन
२कारण लिखिए :-
  1. (क) गृहस्वामी द्वारा जूलिया से माफी माँगना : गृहस्वामी ने जूलिया से इसलिए माफी माँगी क्योंकि उसने जूलिया को सबक सिखाने के लिए उसके साथ एक छोटा-सा क्रूर मजाक किया था और उसे मानसिक पीड़ा दी थी।
  2. (ख) गृहस्वामी से जूलिया को संसार के साथ लड़ने के लिए कहना : गृहस्वामी ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि इस कठोर और हृदयहीन संसार में दब्बू और रीढ़रहित (डरपोक) लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है; यदि वे अपने अधिकारों के लिए नहीं लड़ेंगे, तो लोग उनका शोषण करते रहेंगे।
३(क) परिच्छेद में प्रयुक्त कोई एक मुहावरा ढूँढ़कर उसका सार्थक वाक्य में प्रयोग कीजिए। (ख) 'पर' शब्द के दो अर्थ लिखिए।

(क) मुहावरे ढूँढ़कर वाक्य प्रयोग :

  • ठग लेना (धोखा देना) : अनजान शहर में एक ठग ने रामू को बातों में उलझाकर ठग लिया।
  • हड़प लेना (बेईमानी से अधिकार कर लेना) : लालची मुनीम ने किसान की सारी जमीन हड़प ली।

(ख) 'पर' शब्द के दो भिन्न अर्थ :

  • पर (१) : पंख (जैसे— चिड़िया के पर बहुत सुंदर हैं।)
  • पर (२) : लेकिन / परंतु (जैसे— मैं स्टेशन गया पर ट्रेन छूट चुकी थी।)
४'संसार में दब्बू और रीढ़रहित लोगों के लिए कोई स्थान नहीं है', इसपर लगभग आठ से दस वाक्यों में अपने विचार लिखिए।

प्रस्तुत पंक्ति का अर्थ यह है कि जो व्यक्ति डरपोक (दब्बू) होता है और जिसमें अन्याय का विरोध करने का साहस (रीढ़) नहीं होता, समाज हमेशा उसका शोषण करता है। हमारा समाज अक्सर कमजोरों को दबाने की कोशिश करता है। यदि हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं रहेंगे और हर अन्याय को चुपचाप सहते जाएँगे, तो लोग हमें कमजोर समझकर हमारा फायदा उठाएँगे।

जीवन संघर्ष का दूसरा नाम है। यहाँ स्वयं को स्थापित करने के लिए हमें निडर और आत्मविश्वासी बनना पड़ता है। जो लोग हर बात में दूसरों के सामने झुक जाते हैं, उन्हें सम्मान नहीं मिलता। सम्मान उसी को मिलता है जो न्याय के लिए अपनी आवाज बुलंद करता है। इसलिए हमें अन्याय को सहने की बजाय पूरी शक्ति और साहस के साथ उसका डटकर मुकाबला करना चाहिए, क्योंकि इस कठोर संसार में कायरों का कोई भविष्य नहीं होता।

भाषा बिंदु (विरामचिह्न)

५नीचे दिए गए चिह्नों के सामने उनके नाम लिखिए तथा वाक्यों में उचित विरामचिह्न लगाइए :-

विरामचिह्नों के नाम :

चिह्ननाम
।पूर्णविराम
[ ]बड़ा कोष्ठक / वर्गाकार कोष्ठक
( )छोटा कोष्ठक / कोष्ठक
?प्रश्नवाचक चिह्न
!विस्मयादिबोधक चिह्न
,अल्पविराम

वाक्यों में उचित विरामचिह्न :

  1. स्त्री शिक्षा को लेकर लेखक के क्या विचार थे ?
  2. श्याम , तुम आ गए !
  3. मोहन बोला , " तुमने जो कुछ कहा , ठीक है ।"
  4. जीवन संग्राम में सब लड़ रहे हैं ; कुछ जीतेंगे , कुछ हारेंगे ।
  5. भरत भैया , ऐसा ना कहो !
  6. अरे ! क्या मैं झूठ बोल रहा हूँ ?
  7. जी , धन्यवाद ।
  8. इसके अलावा , तुमने तीन छुट्टियाँ और ली हैं , ठीक है न ?
  9. अच्छा ! और इतनी बड़ी बात तुम्हारी मालकिन ने मुझे बताई तक नहीं ?
  10. आप कह रहे हैं , तो आपने दिए ही होंगे ।

मौलिक सृजन

६'जूलिया की जगह आप होते तो' विषय पर अपने विचार स्पष्ट कीजिए।

यदि जूलिया की जगह मैं होता, तो मैं कभी भी गृहस्वामी के अन्यायपूर्ण व्यवहार को चुपचाप नहीं सहता। सबसे पहले, मैं नौकरी शुरू करने से पहले ही अपनी तनख्वाह (चालीस रूबल) और छुट्टियों की शर्तों को लिखित रूप में तय करता ताकि बाद में कोई विवाद न हो।

जब गृहस्वामी मेरी तनख्वाह में से बेवजह पैसे काटने लगता (जैसे रविवार की छुट्टी, प्याली टूटना या जैकेट फटना), तो मैं तुरंत उसका विरोध करता। मैं डरकर या रुआँसी होकर उनकी हाँ-में-हाँ मिलाने के बजाय आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखता और उन्हें याद दिलाता कि मेरी क्या-क्या जिम्मेदारियाँ थीं और मैंने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया है। मैं उन्हें स्पष्ट बता देता कि मेरे हक के पैसे बिना मेरी गलती के काटना सरासर अन्याय है। मैं यह मानता हूँ कि जो इंसान अपने हक के लिए खुद नहीं लड़ता, समाज में कोई दूसरा उसकी मदद के लिए आगे नहीं आता।