१. धरती का आँगन महके
कवि — डॉ. प्रकाश दीक्षित | संपूर्ण स्वाध्याय, प्रश्न-उत्तर, भाषा बिंदु, और निबंध लेखन। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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स्वाध्याय (सूचना के अनुसार कृतियाँ करो)
- धरती का आँगन इनसे महके — कर्मज्ञान और विज्ञान से।
- धरती का श्रृंगार इनसे होगा — फूल और फलों से।
- मेधा की ऊँचाई नापेगा — प्रतिभा का पैमाना
- हम सब मिलकर करें — वसुधा का जयगान (अर्चना)
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भाषा बिंदु
| शब्द | समानार्थी शब्द | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| शरीर | तन / देह | नियमित व्यायाम करने से हमारा तन स्वस्थ और स्फूर्तिदायक रहता है। |
| मनुष्य | इनसान / मानव | हर इनसान को सच्चाई और ईमानदारी के मार्ग पर चलना चाहिए। |
| पृथ्वी | धरती / वसुधा | यह धरती हमारी माता है, हमें इसे प्रदूषण से बचाना चाहिए। |
| छाती | सीना / वक्षस्थल | सीमा पर तैनात वीर सैनिकों को देखकर हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। |
| पथ | राह / रास्ता | कठिनाइयों के बावजूद हमें हमेशा सत्य की राह पर चलना चाहिए। |
| सर्वनाम का प्रकार | सर्वनाम शब्द | वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| पुरुषवाचक सर्वनाम | मैं, तुम, हम, वह | मैं कल अपने परिवार के साथ गाँव जा रहा हूँ। / वह बहुत अच्छा गाती है। |
| निश्चयवाचक सर्वनाम | यह, ये | यह मेरी हिंदी की नई पुस्तक है। |
| अनिश्चयवाचक सर्वनाम | कोई, कुछ | लगता है बाहर दरवाजे पर कोई आया है। / दाल में कुछ काला है। |
| प्रश्नवाचक सर्वनाम | कौन, क्या | तुम्हें जन्मदिन पर उपहार में क्या चाहिए? |
| संबंधवाचक सर्वनाम | जो-सो, जैसा-वैसा | जो मेहनत करेगा, वह अवश्य सफल होगा। |
| निजवाचक सर्वनाम | स्वयं, खुद, अपने-आप | मैं अपना सारा गृहकार्य स्वयं करता हूँ। |
उपयोजित लेखन व कल्पना पल्लवन
छाते की आत्मकथा
मैं एक छाता हूँ। मेरा जन्म एक बड़े से कारखाने में हुआ था, जहाँ मुझे मजबूत लोहे की तीलियों और सुंदर काले रंग के वाटरप्रूफ कपड़े से बनाया गया। कारखाने से निकलकर मैं शहर की एक बड़ी दुकान में आ गया। वहाँ कई दिनों तक मैं अन्य रंग-बिरंगे छातों के साथ टँगा रहा।
एक दिन अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। एक सज्जन जल्दी-जल्दी दुकान में आए और उन्होंने मुझे खरीद लिया। उस दिन मैंने पहली बार बारिश के पानी से अपने मालिक को बचाया। मुझे बहुत गर्व महसूस हुआ। तब से मैं उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। वे चिलचिलाती धूप हो या मूसलाधार बारिश, हमेशा मुझे अपने साथ रखते हैं।
मैं हमेशा दूसरों की भलाई के लिए खुलता हूँ और धूप-बारिश खुद सहकर दूसरों को राहत देता हूँ। यही मेरे जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य और मेरी सच्ची खुशी है।
आज के समय में विज्ञान और तकनीक ने बहुत तरक्की कर ली है। इंसान चंद्रमा और मंगल ग्रह तक पहुँच गया है। लेकिन इसी विज्ञान ने अत्यंत विनाशकारी परमाणु हथियार और मिसाइलें भी बना ली हैं। आज दुनिया के कई देशों के बीच युद्ध और तनाव का माहौल है। ऐसे में 'विश्व शांति' की माँग सबसे अधिक प्रासंगिक और आवश्यक हो गई है।
युद्ध से केवल विनाश, मृत्यु और भुखमरी ही फैलती है। यदि हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित और खुशहाल जीवन जिएँ, तो हमें युद्ध को छोड़कर प्रेम, भाईचारे और शांति का मार्ग अपनाना होगा। सभी देशों को मिलकर विनाशकारी अस्त्रों को नष्ट करना चाहिए और विज्ञान का उपयोग केवल मानवता की भलाई के लिए करना चाहिए।
इस कविता से मैंने यह समझा कि ज्ञान और विज्ञान का विकास बहुत आवश्यक है, लेकिन इसका उपयोग मानवता के विनाश के लिए (जैसे घातक हथियार बनाने में) कभी नहीं होना चाहिए। विज्ञान का उपयोग धरती को सुंदर बनाने, फसलें उगाने और समाज में शांति व स्नेह फैलाने के लिए होना चाहिए। सच्ची सुंदरता अच्छे आचरण (सदाचार) और मानवता में है, केवल बौद्धिक तरक्की में नहीं।