२. फूल और काँटे
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' रचित कविता 'फूल और काँटे' का संपूर्ण स्वाध्याय, प्रश्न-उत्तर और व्याकरण।
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मैंने समझा (कविता का भावार्थ) : इस कविता के माध्यम से कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' जी ने बताया है कि फूल और काँटे एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं, उन पर एक जैसी चाँदनी, धूप, हवा और बारिश पड़ती है। परंतु फिर भी दोनों का स्वभाव बिलकुल अलग होता है। काँटा दूसरों को कष्ट देता है, उँगलियाँ छेदता है और कपड़े फाड़ता है; जबकि फूल सभी को अपनी सुगंध देता है और तितलियों व भौरों को रस पिलाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मनुष्य विशिष्ट कुल (परिवार) में जन्म लेने से नहीं, बल्कि अपने अच्छे कर्मों और सद्व्यवहार से ही बड़ा बनता है।
स्वाध्याय
- (क) रात में उनपर चमकता चाँद भी, एक ही-सी चाँदनी है डालता।
- (ख) प्यार डूबी तितलियों के पर कतर, भौर का है वेध देता श्याम तन।
(च) फूल किनको गोद में लेता है ?
फूल प्यार से तितलियों को अपनी गोद में लेता है।
(छ) बड़प्पन की कसर रह जाने पर क्या काम नहीं देती ?
यदि मनुष्य के स्वभाव और कर्मों में बड़प्पन की कसर (कमी) रह जाए, तो उसके ऊँचे कुल (परिवार) की बड़ाई कोई काम नहीं देती।
(ज) कौन एक-सा बरसता है ?
मेह (बादल) फूल और काँटे दोनों पर एक-सा बरसता है।
(झ) फूल किसको रस पिलाता है ?
फूल भँवरे (भौर) को अपना अनूठा और मीठा रस पिलाता है।
भाषा की ओर
ज्वालामुखी के चित्र में दिए गए वर्णों से बनाए गए शब्द:
| शब्द-जोड़ी | वाक्य में प्रयोग |
|---|---|
| समानार्थी : पुष्प = फूल | बगीचे में सुंदर पुष्प खिले हैं। / मुझे गुलाब का फूल बहुत पसंद है। |
| समानार्थी : जल = पानी | नदी का जल बहुत शीतल है। / हमें पानी को व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए। |
| समानार्थी : मेह = बादल | आज आसमान में काले मेह घिरे हैं। / बारिश के मौसम में बादल गरजते हैं। |
| विरुद्धार्थी : रात × दिन | रात के समय चाँदनी छिटकती है। / मजदूर दिन भर कड़ी मेहनत करते हैं। |
| विरुद्धार्थी : छोटा × बड़ा | मेरे पास एक छोटा-सा खिलौना है। / मुंबई एक बहुत बड़ा शहर है। |
| विरुद्धार्थी : मान × अपमान | हमें बड़ों का मान-सम्मान करना चाहिए। / किसी गरीब का अपमान नहीं करना चाहिए। |
| विरुद्धार्थी : उदय × अस्त | सूर्य पूर्व दिशा में उदय होता है। / शाम के समय सूर्य पश्चिम में अस्त होता है। |
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अन्य कृतियाँ
फूल का नाम : मुझे 'गुलाब' का फूल बहुत पसंद है।
उपयोग : गुलाब के फूल का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है। इसे पूजा में भगवान को अर्पित किया जाता है, सजावट के लिए उपयोग में लाया जाता है और इससे गुलाबजल तथा इत्र (Perfume) भी बनाया जाता है।
गंध : गुलाब की गंध (खुशबू) बहुत ही मनमोहक और भिनी-भिनी होती है, जो मन को प्रसन्नता और शांति से भर देती है।
| छोटे पौधे (क्षुप/हर्ब) | मध्यम पेड़ (झाड़ी/श्रब) | बड़े पेड़ (वृक्ष/ट्री) |
|---|---|---|
| १. तुलसी | १. जास्वंद (गुड़हल) | १. नीम |
| २. गेंदा | २. नीबू | २. आम |
| ३. पुदीना | ३. कनेर | ३. पीपल |
| ४. गुलाब | ४. सीताफल | ४. बरगद |
इस विचार का अर्थ है कि मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए जिससे दूसरों को कष्ट पहुँचे। हमें समाज में 'फूल' के समान बनना चाहिए, जो अपनी कोमलता और सुगंध से सभी के मन को प्रसन्न करता है। हमें कभी 'शूल' (काँटे) के समान नहीं बनना चाहिए, जो लोगों को चुभता है और उन्हें पीड़ा देता है। अच्छे कर्म, मीठी वाणी और परोपकार से हम फूल बन सकते हैं, जबकि बुरा व्यवहार और स्वार्थ हमें शूल बना देते हैं।
यह एक वाचन और भाषण कौशल्य का उपक्रम है। विद्यार्थी खादी ग्रामोद्योग (Khadi and Village Industries Commission) की वेबसाइट या इंटरनेट से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं कि किस प्रकार किसान खेतों में कपास उगाते हैं, चरखे या मशीन से उसका धागा बनाया जाता है, फिर करघे (Handloom) पर उसकी बुनाई होती है। निर्माण प्रक्रिया पूरी होने के बाद खादी के कपड़ों का अलग-अलग केंद्रों पर वितरण किया जाता है और अंत में खादी भंडारों के माध्यम से उनका विक्रय (बिक्री) किया जाता है।