१. भारत महिमा
कवि — जयशंकर प्रसाद | संपूर्ण स्वाध्याय, पद्य विश्लेषण, और भावार्थ — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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कवि परिचय : जयशंकर प्रसाद जी छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। प्रस्तुत कविता में कवि ने अपने देश के गौरवशाली अतीत का सजीव वर्णन किया है। उनका कहना है कि हमें अपने देश पर गर्व करते हुए उसके प्रति अपना सर्वस्व निछावर करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।
स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)
निम्नलिखित पंक्तियों का तात्पर्य लिखिए :
१. कहीं से हम आए थे नहीं
तात्पर्य : इसका अर्थ है कि हम भारतीय किसी अन्य स्थान या विदेशी भूमि से आकर यहाँ नहीं बसे हैं। भारत ही हमारी जन्मभूमि है और हम आदिकाल से मूल रूप से यहीं के निवासी हैं।
२. वही हम दिव्य आर्य संतान
तात्पर्य : इसका अर्थ है कि आज भी हमारे अंदर अपने महान आर्य पूर्वजों का रक्त, साहस, ज्ञान, शांति और शक्ति विद्यमान है। हम उन्हीं महान और चरित्रवान आर्यों की दिव्य संतान हैं।
| 'अ' समूह | 'आ' समूह (सही उत्तर) |
|---|---|
| १. संचय | दान (हमारे संचय में था दान) |
| २. सत्य | वचन (वचन में सत्य) |
| ३. अतिथि | देव (अतिथि थे सदा हमारे देव) |
| ४. हृदय | तेज (हृदय में तेज) |
१. कविता में प्रयुक्त दो धातुओं के नाम :
लोहा (विजय केवल लोहे की नहीं)
स्वर्ण (सोना) (मिला था स्वर्ण भूमि को रत्न)
२. भारतीय संस्कृति की दो विशेषताएँ :
१. दानशीलता (संचय में दान)
२. अतिथि सत्कार (अतिथियों को देव मानना)
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पसंदीदा पंक्तियाँ :
"जिएँ तो सदा इसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष ।
निछावर कर दें हम सर्वस्व, हमारा प्यारा भारतवर्ष ।"
भावार्थ :
कवि जयशंकर प्रसाद जी कहते हैं कि हम जब तक जिएँ, अपने प्यारे देश भारतवर्ष के लिए ही जिएँ। हमारे हृदय में हमेशा इस बात का अभिमान और खुशी रहे कि हमने इस महान भूमि पर जन्म लिया है। हमारा देश हमें अपने प्राणों से भी प्यारा है और आवश्यकता पड़ने पर हम इसकी रक्षा के लिए अपना सब कुछ (सर्वस्व) न्योछावर करने के लिए हमेशा तैयार रहें।
| १. रचनाकार का नाम | जयशंकर प्रसाद |
| २. रचना का प्रकार | कविता (छायावादी काव्य) |
| ३. पसंदीदा पंक्ति | "जिएँ तो सदा इसी के लिए, यही अभिमान रहे यह हर्ष । निछावर कर दें हम सर्वस्व, हमारा प्यारा भारतवर्ष ।" |
| ४. पसंदीदा होने का कारण | इन पंक्तियों में सच्ची देशभक्ति और त्याग की भावना अत्यंत सुंदर ढंग से व्यक्त हुई है, जो हमें मातृभूमि के प्रति अपना सर्वस्व अर्पण करने की प्रेरणा देती है। |
| ५. रचना से प्राप्त संदेश | इस कविता से हमें यह महान संदेश मिलता है कि हमें अपने देश के गौरवशाली अतीत, संस्कृति और महापुरुषों पर गर्व करना चाहिए। हमें अपने अंदर वीरता, नम्रता, दानशीलता और सत्य जैसे भारतीय गुणों को हमेशा जीवित रखना चाहिए तथा देश की रक्षा के लिए सदा तत्पर रहना चाहिए। |