कक्षा 5 हिंदी · वीणा · CBSE

2. न्याय की कुर्सी

कहानी ‘न्याय की कुर्सी’ के सभी अभ्यास — विराम चिह्न, संज्ञा-विशेषण, बैठने की वस्तुएँ और लोक पहेलियाँ — सरल भाषा में। NCERT वीणा, कक्षा 5.

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कहानी का सार : उज्जैन नगरी के बाहर एक मैदान में लड़के खेल रहे थे। एक लड़के को टीले में दबा एक चिकना पत्थर मिला। वह उस पर बैठकर राजा बन गया और फरियाद सुनकर फैसले करने लगा। उसके फैसले इतने सही होते थे कि नगर के लोग राजा के दरबार के बजाय उसी के पास आने लगे। राजा ने देखा कि नया लड़का बैठने पर भी सही न्याय होता है। उसने टीला खुदवाया। वह पत्थर राजा विक्रमादित्य का सिंहासन निकला। राजा जब उस पर बैठने लगा, तो चार मूर्तियों ने उससे चोरी, झूठ और दूसरों को चोट पहुँचाने के बारे में पूछा। राजा हर बार पीछे हट गया। अंत में घमंड से बैठने चला, तो चौथी मूर्ति सिंहासन समेत आकाश में उड़ गई। (लेखिका — लीलावती भागवत)

बातचीत के लिए

1आपका प्रिय खेल कौन-सा है? आप उसे कैसे खेलते हैं?

मेरा प्रिय खेल खो-खो है। इसमें दो टीमें होती हैं। एक टीम के खिलाड़ी एक पंक्ति में बैठते हैं। एक खिलाड़ी दूसरी टीम के खिलाड़ियों को छूने के लिए दौड़ता है। वह किसी बैठे साथी की पीठ छूकर ‘खो’ कहता है। तब वह साथी दौड़ने लगता है।

2क्या आपने कभी किसी समस्या का समाधान किया है? अपना अनुभव साझा कीजिए।

हाँ, एक बार मेरे दो मित्र एक ही गेंद से पहले खेलने के लिए झगड़ रहे थे। मैंने कहा कि दोनों दस-दस मिनट बारी-बारी से खेलो। दोनों मान गए और झगड़ा खत्म हो गया।

3यदि आप राजा के स्थान पर होते और आपको लड़के के बारे में पता चलता तो आप क्या करते?

मैं लड़के से मिलने जाता/जाती। उसकी प्रशंसा करता/करती। मैं उसे अपने दरबार में बुलाकर न्याय के काम में अपनी सहायता के लिए कहता/कहती। मैं उससे गुस्सा नहीं करता/करती।

4लड़के के अंदर ऐसे कौन-कौन से गुण होंगे जिनके कारण वह सिंहासन पर बैठ पा रहा था?

लड़का भोला-भाला और सच्चा था। उसके मन में कोई बुराई (कलुष) नहीं थी। वह ईमानदार था। वह सबकी बात ध्यान से सुनता था और निष्पक्ष फैसला करता था।

पाठ से

1राजा को लड़के द्वारा न्याय करने के विषय में कैसे पता चला?

(ख) लोगों द्वारा लड़के के न्याय की प्रशंसा सुनकर

2राजा को सबसे अधिक आश्चर्य किस बात से हुआ?

(घ) स्वयं सिंहासन में ही कोई चमत्कारी शक्ति विद्यमान थी।

3लड़कों को यह खेल इतना अच्छा क्यों लगा कि वे प्रतिदिन इसे खेलने लगे?

(क) क्योंकि वे राजा जैसा बनने का आनंद ले रहे थे।

(ग) क्योंकि उन्हें न्याय करने का अनुभव अच्छा लगा।

4राजा ने उपवास और प्रायश्चित क्यों किया?

(क) ताकि वह सिंहासन पर बैठने के योग्य बन सके।

(ग) क्योंकि मूर्तियों ने उसे ऐसा करने के लिए कहा था।

सोचिए और लिखिए

1सभी लड़के सिंहासन पर बैठ पा रहे थे लेकिन राजा नहीं बैठ पाया। ऐसा क्यों?

लड़के भोले-भाले थे। उनके मन में कोई बुराई नहीं थी। राजा ने चोरी की थी, झूठ बोला था और दूसरों को चोट पहुँचाई थी। उसके मन में घमंड भी था। इसलिए राजा सिंहासन पर नहीं बैठ पाया।

2क्या राजा को प्रायश्चित करने के बाद सिंहासन पर बैठने का अधिकार मिलना चाहिए था? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।

नहीं, राजा को यह अधिकार नहीं मिलना चाहिए था। उसने केवल उपवास और पूजा की, पर अपना स्वभाव नहीं बदला। अंत में भी वह स्वयं को सबसे धनवान, बलवान और बुद्धिमान मानकर घमंड कर रहा था।

3दोनों किसानों ने अपने झगड़े के निपटारे के लिए राजा के दरबार में जाने के बजाय लड़के के पास जाने का फैसला क्यों किया?

टीलेवाले लड़के के न्याय की चारों ओर चर्चा थी। लोग मानते थे कि उसमें कोई दैवी शक्ति है। उसके फैसले से सबको संतोष होता था। इसलिए किसान लड़के के पास गए।

4चौथी मूर्ति सिंहासन के साथ आकाश में क्यों उड़ गई?

राजा के मन में घमंड था। वह स्वयं को सबसे धनवान, बलवान और बुद्धिमान मानता था। उसका मन लड़कों जैसा भोला और साफ़ नहीं था। इसलिए वह सिंहासन के योग्य नहीं था और चौथी मूर्ति सिंहासन समेत उड़ गई।

5इस कहानी को एक नया शीर्षक दीजिए और बताइए कि आपने यह शीर्षक क्यों चुना?

नया शीर्षक — सच्चे मन का सिंहासन

यह सिंहासन केवल सच्चे और भोले मन वाले को ही बैठने देता था। इसलिए मैंने यह शीर्षक चुना।

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अनुमान और कल्पना

1कहानी में सिंहासन की मूर्तियाँ उड़कर किसी और जगह चली जाती हैं। वे कहाँ जाती होंगी और वहाँ क्या करती होंगी?

मूर्तियाँ शायद स्वर्ग में या किसी ऐसे स्थान पर जाती होंगी जहाँ कोई सच्चा और न्यायप्रिय व्यक्ति रहता हो। वहाँ वे उस व्यक्ति की सहायता करती होंगी और लोगों को सही न्याय दिलाती होंगी।

2यदि इस कहानी के अंत में राजा सिंहासन पर बैठने में सफल हो जाता तो क्या होता?

यदि राजा सिंहासन पर बैठ जाता तो वह और भी घमंडी हो जाता। सिंहासन का चमत्कार समाप्त हो जाता। तब लोगों को सच्चा न्याय नहीं मिलता।

भाषा की बात

1नीचे दिए गए वाक्यों में उचित स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए —

(क) चौथी मूर्ति ने कहा, “ठहरो! जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे, वे भोले-भाले थे। उनके मन में कलुष नहीं था। अगर तुमको विश्वास है कि तुम इस योग्य हो तो इस सिंहासन पर बैठ सकते हो।”

(ख) राजा बड़ी देर तक सोचता रहा। फिर उसने मन ही मन कहा, “अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ। मैं राजा हूँ। मुझसे ज्यादा धनवान, बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा? मैं अवश्य इस सिंहासन पर बैठने योग्य हूँ।”

2“तीसरी मूर्ति भी उड़ गई।” इस वाक्य के आधार पर प्रश्नों के उत्तर लिखिए —

(क) इस वाक्य में संज्ञा शब्द — मूर्ति

(ख) संज्ञा की विशेषता बताने वाला शब्द — तीसरी

3कहानी में से चुने गए वाक्यों में विशेषण शब्द पहचानिए —
वाक्यविशेषण
(क) एक दिन लड़कों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था।एक
(ख) उज्जैन की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ा मैदान था।प्राचीन, ऐतिहासिक, लंबा-चौड़ा
(ग) इतनी छोटी उम्र में इतनी बुद्धि का होना आश्चर्य की बात है।इतनी, छोटी
(घ) राजा ने देखा कि वह पत्थर नहीं, बहुत ही सुंदर सिंहासन था।सुंदर
(ङ) बात ही बात में वहाँ अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई।अच्छी खासी
4आपमें कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए जिससे आप कहानी के सिंहासन पर बैठ सकें?
  • मैं हमेशा सच बोलूँ।
  • मैं कभी चोरी न करूँ।
  • मैं किसी को चोट न पहुँचाऊँ।
  • मेरे मन में घमंड और बुराई न हो।
  • मैं सबकी बात सुनकर निष्पक्ष फैसला करूँ।

पाठ से आगे

1आप अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए किन-किनके पास जाते हैं? आप उन्हीं के पास क्यों जाते हैं?

मैं अपनी समस्याएँ सुलझाने के लिए माता-पिता, दादाजी और अपने शिक्षक के पास जाता/जाती हूँ। वे मुझसे बहुत प्यार करते हैं। वे अनुभवी हैं और मुझे हमेशा सही सलाह देते हैं।

2क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी ने आपके साथ अन्याय किया हो? आपने उस स्थिति का सामना कैसे किया?

हाँ, एक बार खेल में एक साथी ने बेईमानी करके मुझे बाहर कर दिया। मैंने उससे झगड़ा नहीं किया। मैंने शांति से अपनी बात कही और खेल शिक्षक को बताया। शिक्षक ने सच जानकर फैसला किया।

पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत

पता लगाकर कीजिए

•बैठने की वस्तुओं का वर्णन कीजिए और आपकी भाषा में उनके नाम लिखिए।
वस्तुवर्णनआपकी भाषा में नाम (मराठी)
चटाईयह घास, बाँस या प्लास्टिक से बनी होती है। इसे भूमि पर बिछाकर बैठा जाता है।चटई
दरीयह मोटे कपड़े या सूती धागों से बनी होती है। यह उत्सवों या सामाजिक कार्यक्रमों में उपयोग की जाती है।सतरंजी
मूढ़ायह बेंत या सरकंडे से बना गोल और ऊँचा आसन होता है। इसे आँगन या बरामदे में रखते हैं।मोढा
चारपाईइसमें लकड़ी के चार पाए होते हैं। इसे रस्सी या निवाड़ से बुना जाता है। इस पर बैठते और सोते हैं।खाट
पीढ़ायह लकड़ी का छोटा और नीचा आसन होता है। रसोई में खाना बनाते या खाते समय इस पर बैठते हैं।पाट
टाट पट्टीयह बोरी (जूट) से बनी लंबी पट्टी होती है। विद्यालयों में बच्चे इस पर बैठते हैं।गोणपाट

तीसरा स्तंभ अपनी भाषा के अनुसार लिखिए। यहाँ मराठी नाम उदाहरण के लिए दिए गए हैं।

बूझो तो जानें

•भारत की अलग-अलग भाषाओं की पहेलियों के उत्तर
पहेलीउत्तर
गोंड पहेली — न खाती है, न पीती है, संग-संग चलती है।छाया
निमाड़ी पहेली — हरे मटके का लाल पेट, रस पी लो भर-भर पेट।तरबूज
मालवी पहेली — एक जानवर ऐसा, जिसकी दुम पर पैसा।मोर
बुंदेली पहेली — एक लकड़ी की ऐसी कहानी, उसमें छिपा है मीठा पानी।गन्ना
बघेली पहेली — एक दीपक से चारों ओर उजियारा।सूर्य

मेरा न्याय