1. किरन
कविता ‘किरन’ के सभी अभ्यास और पठन-सामग्री ‘पेड़ का जादू’ — सरल भाषा में प्रश्न-उत्तर। NCERT वीणा, कक्षा 5.
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इस पृष्ठ पर कविता ‘किरन’ के सभी प्रश्नों के उत्तर और पठन-सामग्री ‘पेड़ का जादू’ दी गई है। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने के रूप में दिए गए हैं। आप अपने अनुभव से भी उत्तर लिख सकते हैं।
कविता का सार : यह कविता निरंकार देव ‘सेवक’ की है। इसमें एक बालिका सूरज की किरन से बात करती है। वह कहती है कि तू आज इतनी जल्दी आ गई और मैं अभी बिस्तर से भी नहीं निकली। कल शाम तक हम साथ खेले। फिर तू सोने चली गई और मैं अकेली रह गई। मैं देर रात तक परी कथाएँ पढ़ती रही। किरन कहती है कि मैं भी कहाँ सो पाती हूँ। तुम्हें सुलाकर मैं दूसरी दुनिया में जाती हूँ। वहाँ सोए बच्चों को जगाती हूँ। वहाँ शाम होती है तो फिर यहाँ लौट आती हूँ।
बातचीत के लिए
सुबह होने पर खिड़की से सूरज की रोशनी अंदर आती है। चिड़ियाँ चहचहाने लगती हैं। मुर्गा बाँग देता है। माँ हमें जगाती है। इससे पता चलता है कि सुबह हो गई है।
- पेड़-पौधे सूर्य के प्रकाश में ही अपना भोजन बनाते हैं।
- फसलें धूप से ही पकती हैं।
- गीले कपड़े, अनाज और पापड़ धूप में सूखते हैं।
- सौर ऊर्जा से बिजली बनती है।
मुझे सुबह का समय अधिक अच्छा लगता है। सुबह हवा ठंडी और ताज़ी होती है। चिड़ियाँ गाती हैं। मन ताज़ा रहता है और पढ़ाई में मन लगता है।
पाठ से
(क) सोते बच्चों को जगाना
(ख) क्योंकि वह पढ़ रही थी।
(क) वह सो रही थी।
सोचिए और लिखिए
जब धरती के इस भाग में रात होती है, तब दूसरे भाग में दिन होता है। किरन वहाँ के बच्चों को जगाने जाती है। इसलिए उसने दूसरी दुनिया में जाने की बात कही।
- वहाँ — धरती का वह दूसरा भाग (दूसरी दुनिया), जहाँ किरन रात में जाती है।
- यहाँ — बालिका की दुनिया, यानी धरती का वह भाग जहाँ बालिका रहती है।
- हम अधिक से अधिक पेड़ लगाएँगे और उनकी देखभाल करेंगे।
- पानी और बिजली बचाएँगे।
- प्लास्टिक का कम प्रयोग करेंगे।
- कचरा इधर-उधर नहीं फेंकेंगे।
- नदियों और तालाबों को साफ़ रखेंगे।
कल तो तेरे साथ शाम तक
खेल बहुत से खेली मैं।
समझ और अनुभव
मुझे अपने आस-पास किसान, माँ, सफ़ाई कर्मचारी, दूधवाला, अखबार वाला, शिक्षक और मज़दूर परिश्रम करते दिखाई देते हैं। ये सब रोज़ समय पर अपना काम करते हैं।
मेरी माँ मुझे रोज़ सुबह जगाती हैं। मेरे पिताजी और बड़े भाई मेरे साथ खेलते हैं। मेरे शिक्षक और दादाजी मुझे प्रोत्साहित करते हैं।
मैं उनकी बात मानता/मानती हूँ। घर के कामों में माँ की मदद करता/करती हूँ। दादाजी को समय पर दवा देता/देती हूँ और मन लगाकर पढ़ता/पढ़ती हूँ।
मकर संक्रांति — यह सूर्य से जुड़ा त्योहार है। यह हर वर्ष 14 जनवरी के आस-पास मनाया जाता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। लोग एक-दूसरे को तिल-गुड़ बाँटते हैं और मीठा बोलने को कहते हैं। बच्चे पतंग उड़ाते हैं।
छठ पूजा (सूर्य), पोंगल (सूर्य), शरद पूर्णिमा (चाँद) और करवा चौथ (चाँद) भी ऐसे त्योहार हैं।
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अनुमान और कल्पना
- यदि किरन कभी न आए तो हमेशा रात और अँधेरा रहेगा। बहुत ठंड होगी। पेड़-पौधे भोजन नहीं बना पाएँगे। धरती पर जीवन संभव नहीं होगा।
- यदि किरन कभी न जाए तो हमेशा दिन रहेगा। बहुत गरमी होगी। हमें सोने और आराम करने का ठीक समय नहीं मिलेगा।
मैं किरन के साथ अमेरिका जाना चाहूँगा/चाहूँगी। जब हमारे यहाँ रात होती है, तब वहाँ दिन होता है। मैं वहाँ के बच्चों से मिलूँगा/मिलूँगी। उनके खेल और विद्यालय देखूँगा/देखूँगी।
भाषा की बात
| शब्द | समानार्थी शब्द |
|---|---|
| नभ | आकाश, अंबर |
| हवा | वायु, पवन |
| पेड़ | वृक्ष, तरु |
| फूल | कुसुम, सुमन |
| दुनिया | संसार, विश्व |
नभचर (आकाश में उड़ने वाला), व्योम (आकाश), विशाल (बहुत बड़ा), सरिता (नदी) और भूमि (धरती) — इन पर घेरा नहीं बनेगा।
(क) मैं आज यह परी-कथा पढ़ूँगा, कल आप पढ़ लेना।
(ख) मैं जब तक खेलने के लिए आई तब तक हरिका चली गई थी।
(ग) वह सुबह आया और शाम को चला गया।
(घ) मेरे जागने और सोने का समय निश्चित है।
सामान्य बात : सूरज निकल आया है। चारों ओर उजाला हो गया है। बच्चे खुश होकर खेलने लगे हैं।
कविता का रूप :
सूरज निकला, हुआ उजाला
भागा दूर अँधेरा काला।
बच्चे दौड़े खेल-खिलौने
खुशियों से भर गए सब कोने।
आपकी बातचीत
मैं बादल से बात करना चाहूँगा/चाहूँगी।
मैं : बादल भैया, तुम कहाँ से आते हो?
बादल : मैं समुद्र के पानी की भाप से बनता हूँ।
मैं : तुम हर दिन क्यों नहीं बरसते?
बादल : मैं वर्षा ऋतु में बरसता हूँ। तभी खेतों को पानी मिलता है।
मैं : धन्यवाद बादल भैया! इस बार खूब बरसना।
सहपाठियों के साथ इस बातचीत का अभिनय कीजिए। (कक्षा गतिविधि)
इसे भी जानिए
हमारी धरती गेंद की तरह गोल है। वह अपनी धुरी पर घूमती हुई सूर्य की परिक्रमा करती है। धरती का जो भाग सूर्य की ओर होता है, वहाँ दिन होता है। दूसरे भाग में रात होती है। इसलिए जब हमारे यहाँ रात होती है, तब किरन धरती के दूसरे भाग में दिन लेकर जाती है।
पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत
- सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं।
- उनका जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका में हुआ था। उनके पिता गुजरात के रहने वाले थे।
- वे अमेरिका की अंतरिक्ष संस्था नासा से जुड़ी रहीं।
- उन्होंने अंतरिक्ष में कई महीने बिताए और कई बार अंतरिक्ष में चहलकदमी (स्पेसवॉक) की।
- वे सन् 2025 में लगभग नौ महीने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहकर धरती पर लौटीं।
पेड़ का जादू
यह पठन-सामग्री है। इसके लेखक विनोद कुमार शुक्ल हैं।
एक बच्चा बुआ के घर पेड़ पर गिलहरी देखता है। वह पूछता है कि बुआ ने गिलहरी कहाँ से खरीदी। बुआ बताती हैं कि गिलहरी खरीदी नहीं है। पेड़ होने से गिलहरी और चिड़ियाँ अपने आप आ जाती हैं। बुआ कहती हैं कि तुम भी घर में पेड़ उगाओ। तब गिलहरी और चिड़िया आएँगी। धूप में पेड़ की छाया मिलेगी और उसमें खेलना अच्छा लगेगा।
बच्चे ने पूछा कि आपने गिलहरी कहाँ से खरीदी।
बुआ के घर में पेड़ था। पेड़ होने से गिलहरी और चिड़ियाँ अपने आप आ जाती थीं।
पेड़ लगाने से पक्षी, गिलहरी और ठंडी छाया अपने आप मिल जाती है। यही पेड़ का जादू है।