कक्षा ९ हिंदी · पहली इकाई

९. वरदान माँगूँगा नहीं

शिवमंगल सिंह 'सुमन' — संजाल, भाषा बिंदु (शुद्ध वाक्य), मौलिक सृजन, अभिव्यक्ति तथा पाठ के आँगन में (स्वाध्याय) के सभी प्रश्नों के उत्तर।

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कविता का परिचय : प्रस्तुत गीत में जनकवि शिवमंगल सिंह 'सुमन' जी ने जीवन को एक 'महा-संग्राम' (युद्ध) बताया है। उन्होंने मनुष्य को स्वाभिमान से जीने, सुख-दुख को समान भाव से अपनाने और कर्तव्य के मार्ग पर डटे रहने की प्रेरणा दी है। कवि का मानना है कि मनुष्य को किसी से दया या वरदान की भीख नहीं माँगनी चाहिए, बल्कि अपने संघर्षों से स्वयं लड़ना चाहिए ।

पाठ के आँगन में (स्वाध्याय)

१सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए :-

(क) कवि इन परिस्थितियों में वरदान नहीं माँगना चाहते :

  1. तिल-तिल मिटने की स्थिति आने पर भी।
  2. सुखद प्रहरों की स्मृति या अपने खंडहरों के लिए।
  3. चाहे जीवन में हार मिले या जीत मिले।
  4. हृदय को ताप (कष्ट) मिलने पर या कोई अभिशाप मिलने पर।

(ख) आकृति पूर्ण कीजिए :

१. सुखद स्मृति इनके लिए है :
अपने खंडहरों के लिए (बीते हुए अच्छे समय के लिए)।
२. कवि भयभीत नहीं है :
हार में और जीत में।
२पद्य में पुनरावर्तन हुई पंक्ति लिखिए।

पद्य में पुनरावर्तन हुई (बार-बार आने वाली) पंक्ति है — वरदान माँगूँगा नहीं ।।

३रेखांकित वाक्यांश के स्थान पर उचित मुहावरा लिखिए :-

वाक्य : रुग्ण शय्या पर पड़ी माता जी को देखकर मोहन का धीरज धीरे-धीरे समाप्त हो रहा था। (तिल-तिल मिटना, जिस्म टूटना)

उत्तर : रुग्ण शय्या पर पड़ी माता जी को देखकर मोहन तिल-तिल मिट रहा था।

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भाषा बिंदु (व्याकरण)

४निम्नलिखित अशुद्ध वाक्यों को शुद्ध करके फिर से लिखिए :-
अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
१. लता कितनी मधुर गाती है।लता कितना मधुर गाती है।
२. तितली के पास सुंदर पंख होते हैं।तितली के पंख सुंदर होते हैं।
३. यह भोजन दस आदमी के लिए है।यह भोजन दस आदमियों के लिए है।
४. कश्मीर में कई दर्शनीय स्थल देखने योग्य है।कश्मीर में कई दर्शनीय स्थल हैं।
५. उसने प्राण की बाजी लगा दी।उसने प्राणों की बाजी लगा दी।
६. तुमने मीट्टी से का प्यार ।तुमने मिट्टी से प्यार किया।
७. यह है न पसीने का धारा ।यह है न पसीने की धारा।
८. आओ सिंहासन में बैठो ।आओ सिंहासन पर बैठो।
९. हम हँसो कि फूले-फले देश ।हम हँसें कि फूले-फले देश।
१०. यह गंगा का है नवल धार ।यह गंगा की है नवल धार।

अभिव्यक्ति (मौलिक सृजन / लेखनीय / संभाषणीय)

५मौलिक सृजन : निम्नलिखित शब्दों के आधार पर कहानी लिखिए तथा उसे उचित शीर्षक दीजिए :- (वृक्ष, अंतरिक्ष, पुस्तक, कैमरा)

कहानी का शीर्षक : सपनों की उड़ान

अमन एक बहुत ही जिज्ञासु लड़का था। उसे ब्रह्मांड और सितारों के बारे में जानना बहुत पसंद था। एक दिन वह अपने घर के पास एक बहुत पुराने और घने वृक्ष के नीचे बैठकर अंतरिक्ष विज्ञान की एक पुस्तक पढ़ रहा था। पुस्तक में ग्रहों, आकाशगंगाओं और अंतरिक्ष यात्रियों की तस्वीरें देखकर उसका मन रोमांचित हो उठा।

तभी उसे याद आया कि उसके पिता ने उसे जन्मदिन पर एक कैमरा उपहार में दिया था। अमन ने तुरंत वह कैमरा निकाला और वृक्ष की टहनियों के बीच से आसमान में चमकते चाँद और तारों की तस्वीरें खींचनी शुरू कर दीं। उस दिन वृक्ष के नीचे बैठकर अमन ने एक दृढ़ निश्चय किया कि वह बड़ा होकर अंतरिक्ष यात्री बनेगा और खुद अपनी आँखों से इस ब्रह्मांड के रहस्य देखेगा। अपनी मेहनत और लगन से वर्षों बाद अमन ने अपना यह सपना सच कर दिखाया।

६लेखनीय : 'जीवन में परिश्रम का महत्त्व' पर अपने विचार लिखिए।

जीवन में परिश्रम (मेहनत) का वही महत्त्व है, जो शरीर में साँसों का होता है। कोई भी महान कार्य बिना परिश्रम के सिद्ध नहीं हो सकता। प्रकृति का हर कण हमें परिश्रम की ही शिक्षा देता है—जैसे चींटी अपने वजन से भारी दाना उठाकर लगातार मेहनत करती है और नदियाँ पहाड़ों का सीना चीरकर अपना रास्ता खुद बनाती हैं।

परिश्रम से ही मनुष्य के जीवन में निखार आता है। जो व्यक्ति आलस्य त्याग कर ईमानदारी से मेहनत करता है, सफलता उसके कदम चूमती है। भाग्य भी केवल उन्हीं का साथ देता है, जो कर्म (परिश्रम) करने से नहीं घबराते। एक विद्यार्थी हो या किसान, वैज्ञानिक हो या सैनिक, हर किसी की सफलता का मूल मंत्र केवल 'कठोर परिश्रम' ही है। अतः हमें जीवन में परिश्रम करने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।

७संभाषणीय : 'गणतंत्र दिवस' के अवसर पर जनतांत्रिक शासन प्रणाली पर अपना मंतव्य प्रकट कीजिए।

सम्माननीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे मित्रों, आज हम सभी यहाँ 'गणतंत्र दिवस' का पावन पर्व मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं। आज ही के दिन १९५० में हमारे देश का संविधान लागू हुआ था और हमारा देश पूर्ण रूप से एक 'जनतांत्रिक' (लोकतांत्रिक) गणराज्य बना था।

जनतांत्रिक शासन प्रणाली का अर्थ है—"जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए शासन।" इस प्रणाली में देश का हर नागरिक सर्वोपरि होता है। हमें अपने नेताओं और सरकार को चुनने का स्वतंत्र अधिकार प्राप्त है। यह प्रणाली हमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देती है, ताकि कोई भी व्यक्ति धर्म, जाति या भाषा के आधार पर भेदभाव का शिकार न हो। किंतु अधिकारों के साथ हमारे कुछ कर्तव्य भी जुड़े हैं। एक सफल जनतंत्र तभी बन सकता है जब हम सभी नागरिक ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करें और देश की उन्नति में अपना योगदान दें। जय हिंद!