कक्षा ९ हिंदी · पहली इकाई

२. बिल्ली का बिलुंगड़ा

राजेंद्र लाल हांडा — कहानी का संजाल, विलोम शब्द, विज्ञापन, पत्र लेखन और स्वाध्याय के सभी प्रश्नों के उत्तर।

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पाठ का परिचय : यह पाठ एक हास्य-व्यंग्य कहानी है। इसमें लेखक राजेंद्र लाल हांडा जी ने एक पालतू बिल्ली के कारण घर में उत्पन्न होने वाली गलतफहमियों और हास्यास्पद स्थितियों का बड़े ही रोचक ढंग से वर्णन किया है।

पाठ के आँगन में

१सूचनानुसार कृतियाँ कीजिए :-

(क) संजाल : घर में बिल्ली पालने के कारण

घर में बहुत चूहों का हो जाना।
चूहों को निकालने के सारे बहुतेरे प्रयत्न असफल होना।
लोहे के ढोलों में भी चूहों का घुसने लगना।
समस्या सुलझाने के लिए मित्रों का परामर्श मिलना।

(ख) कहानी के प्रमुख पात्र :

लेखक बिल्ली अमरू (नौकर) थानेदार
२उत्तर लिखिए : बिल्ली के रवैये में आया परिवर्तन-
  1. बिल्ली घर के सदस्यों के आगे-पीछे फिरने की बजाय रसोई के आसपास कोने में दुबककर बैठ जाती थी।
  2. जब मौका लगता, वह मजे से जो जी में आता, खाती थी (जैसे कढ़े हुए दूध का दही)।
३स्पष्ट कीजिए : घर के सदस्यों का बिल्ली के प्रति व्यवहार पहले और बाद में-
स्थितिव्यवहार (खान-पान एवं बर्ताव)
पहलेबिल्ली की खूब खातिर होती थी। बच्चे कभी उसे दूध पिलाते, कभी रोटी देते। वह प्रायः सब लोगों की थाली से जूठन खाती थी।
बाद मेंसदस्य बिल्ली से तंग आ गए थे और उनका व्यवहार बदल गया। उसे अब खाने को नहीं दिया जाता था, जिसके कारण वह चोरी छिपे रसोई से खाने लगी।

पाठ से आगे

४'प्राणी हमसे कहते हैं, जियो और जीने दो' इस विषय पर स्वमत प्रकट कीजिए।

इस पृथ्वी पर मनुष्य के साथ-साथ अनेक प्रकार के प्राणियों और पक्षियों का भी निवास है। प्रकृति ने सभी को जीवन जीने का समान अधिकार दिया है। 'जियो और जीने दो' का सिद्धांत हमें यह सिखाता है कि जिस प्रकार हम स्वतंत्रता और शांति से जीना चाहते हैं, उसी प्रकार अन्य प्राणियों को भी उनके प्राकृतिक परिवेश में सुरक्षित रहने का अधिकार है।

मनुष्य अपने स्वार्थ और मनोरंजन के लिए अक्सर मूक प्राणियों पर अत्याचार करता है, उनके आवासों (जंगलों) को नष्ट कर देता है और उन्हें पिंजरों में कैद करता है। यह प्रकृति के संतुलन के विरुद्ध है। प्राणी भले ही बोल नहीं सकते, लेकिन उनके पास भी भावनाएँ होती हैं। वे हमसे यही चाहते हैं कि हम उनके जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप न करें, उनके प्रति दया भाव रखें और उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करें। तभी मनुष्य और प्रकृति के बीच सही मायनों में संतुलन और सद्भाव बना रह सकता है।

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भाषा बिंदु

५शब्द कोश की सहायता से रेखांकित शब्दों के विलोम खोजिए तथा उनसे नए वाक्य लिखिए :-
शब्द (रेखांकित)विलोम शब्दनए शब्द से वाक्य प्रयोग
(१) समझदारनासमझछोटा बच्चा बहुत नासमझ होता है।
(२) अल्पभाषीवाचालसुरेश बहुत वाचाल है, वह दिन भर बोलता रहता है।
(३) पुरानीनईपिताजी ने मेरे लिए एक नई साइकिल खरीदी है।
(४) दुत्कारपुचकाररोते हुए बच्चे को माँ ने प्यार से पुचकारा।
(५) समर्थनविरोधहमें समाज में फैली गलत प्रथाओं का विरोध करना चाहिए।
(६) दुर्लभसुलभआजकल बाजारों में हर तरह की सुविधा सुलभ है।
(७) तटस्थपक्षपातीन्यायाधीश को निर्णय लेते समय पक्षपाती नहीं होना चाहिए।
(८) भौतिकआध्यात्मिकभारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक ज्ञान को बहुत महत्त्व दिया गया है।
(९) शुष्कआर्द्र / नमबारिश होने के बाद हवा नम हो जाती है।
(१०) अपव्ययमितव्ययहमें धन का मितव्यय करना चाहिए।

अभिव्यक्ति (लेखनीय एवं मौलिक सृजन)

६लेखनीय : आपका पालतू कुत्ता दो दिनों से लापता है। उसके लिए समाचारपत्र में देने हेतु विज्ञापन तैयार कीजिए। निम्न मुद्दों का आधार लें (रंग, नस्ल, संपर्क)।

लापता! लापता!! लापता!!!

सभी को सूचित किया जाता है कि मेरा प्यारा पालतू कुत्ता पिछले दो दिनों (१५ अक्टूबर) से सिविल लाइंस क्षेत्र से लापता है।

  • नस्ल : लैब्राडोर (Labrador)
  • रंग : सुनहरा भूरा (Golden Brown)
  • पहचान : उसके गले में लाल रंग का पट्टा (कॉलर) बँधा है। वह 'जॉनी' नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया देता है।

जो कोई भी व्यक्ति उसे ढूँढकर लाएगा या उसकी सही जानकारी देगा, उसे ₹५,०००/- का नकद इनाम दिया जाएगा।

संपर्क करें :
अमन शर्मा
म. नं. ४५, सिविल लाइंस, नागपुर
मो. : ९८७६५XXXXX

७मौलिक सृजन : अपने परिसर में लावारिस जानवरों की बढ़ती संख्या एवं उनसे होने वाली परेशानियों के बारे में संबंधित अधिकारी को पत्र लिखकर सूचना दीजिए।

दिनांक: २० अक्तूबर, २०२६

प्रति,
स्वास्थ्य अधिकारी महोदय,
नगर निगम,
नागपुर - ४४०००१

विषय : परिसर में लावारिस जानवरों की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाली परेशानियों के संदर्भ में।

महोदय,

मैं अमन वर्मा, शंकर नगर परिसर (वार्ड नं. १२) का निवासी हूँ। मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान हमारे क्षेत्र में लगातार बढ़ती लावारिस जानवरों (विशेषकर कुत्तों और गायों) की संख्या की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।

पिछले कुछ महीनों से हमारे परिसर में लावारिस जानवरों की संख्या बहुत बढ़ गई है। आवारा कुत्ते रात के समय राहगीरों और दुपहिया वाहन चालकों के पीछे दौड़ते हैं, जिससे कई दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं। इसके अलावा, लावारिस पशु दिन भर कचरा पेटियों के आसपास गंदगी फैलाते हैं और सड़क के बीचों-बीच बैठ जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है। बच्चों का घर से बाहर निकलना और पार्कों में खेलना भी असुरक्षित हो गया है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस समस्या का जल्द से जल्द संज्ञान लें और संबंधित विभाग को इन लावारिस जानवरों को सुरक्षित रूप से पशु आश्रय स्थल (एनिमल शेल्टर) में पहुँचाने का निर्देश दें। आशा है आप इस दिशा में शीघ्र कार्यवाही करेंगे।

धन्यवाद।

भवदीय,
अमन वर्मा
१२४, शंकर नगर, नागपुर
ईमेल: aman.v@email.com