७. मेरे रजा साहब
लेखिका — सुजाता बजाज | संपूर्ण स्वाध्याय, कहानी लेखन (जहाँ चाह होती है वहाँ राह निकल आती है), और भाषा बिंदु। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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स्वाध्याय (सूचनानुसार कृतियाँ करो)
- मुंबई
- लंदन
- पेरिस
- न्यूयॉर्क
- पाठ में आए विविध देशों (तथा शहरों) के नाम : भारत, फ्रांस (पेरिस), इंग्लैंड (लंदन), अमेरिका (न्यूयॉर्क)।
- पाठ में उल्लिखित विविध भाषाएँ : हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी और फ्रेंच।
- दाल-चावल
- रोटी-आलू की सब्जी
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भाषा बिंदु
| क्र. | वाक्य | उद्देश्य (Subject) | विधेय (Predicate) |
|---|---|---|---|
| १. | मैं दिल्ली पहुँची थी अपनी 'गणपति प्रदर्शनी' के लिए। | मैं | दिल्ली पहुँची थी अपनी 'गणपति प्रदर्शनी' के लिए। |
| २. | रजा साहब सपने में आए। | रजा साहब | सपने में आए। |
| ३. | वे गणेश को भी पूजते थे। | वे | गणेश को भी पूजते थे। |
| ४. | वे अस्पताल में शून्य की तरह लेटे हुए थे। | वे | अस्पताल में शून्य की तरह लेटे हुए थे। |
| ५. | मेरी बेटी हेलेना बहुत खूबसूरत हिंदी बोलती थी। | मेरी बेटी हेलेना | बहुत खूबसूरत हिंदी बोलती थी। |
| ६. | फूल उन्हें बहुत प्यारे लगते थे। | फूल | उन्हें बहुत प्यारे लगते थे। |
| ७. | दोनों एक-दूसरे के ईमानदार समालोचक थे। | दोनों | एक-दूसरे के ईमानदार समालोचक थे। |
| ८. | ट्रेन लेट थी। | ट्रेन | लेट थी। |
| ९. | मैं एकदम सावधान हो गई। | मैं | एकदम सावधान हो गई। |
| १०. | वे तुरंत खड़े हो गए। | वे | तुरंत खड़े हो गए। |
जानकारी: वाक्य में जिसके विषय में कुछ कहा जाता है, उसे 'उद्देश्य' कहते हैं (आमतौर पर कर्ता)। उद्देश्य के विषय में जो कुछ कहा जाता है, उसे 'विधेय' कहते हैं (कर्म और क्रिया)।
उपयोजित लेखन व मौलिक सृजन
जहाँ चाह, वहाँ राह
रामू एक गरीब किसान का बेटा था। उसे पढ़ने-लिखने का बहुत शौक था, लेकिन गाँव में स्कूल केवल पाँचवीं कक्षा तक ही था और आगे की पढ़ाई के लिए शहर जाना पड़ता था। रामू के पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि वे उसे शहर भेज सकें।
रामू निराश नहीं हुआ। उसने गाँव के एक पढ़े-लिखे रिटायर मास्टर जी से विनती की कि वे उसे पुरानी किताबें दे दें। दिन भर वह खेतों में पिता की मदद करता और रात को स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर मेहनत से पढ़ता। उसकी लगन देखकर मास्टर जी ने उसे मुफ्त में पढ़ाना शुरू कर दिया।
कुछ वर्षों बाद, रामू ने अपनी मेहनत के बल पर शहर की बड़ी परीक्षा छात्रवृत्ति (Scholarship) के साथ पास कर ली और शहर के सबसे अच्छे कॉलेज में प्रवेश पा लिया। सच ही कहा गया है कि यदि मन में पक्की इच्छा (चाह) हो, तो सफलता का रास्ता (राह) अपने आप निकल आता है।
कला मनुष्य की भावनाओं, विचारों और कल्पनाओं को व्यक्त करने का सबसे सुंदर माध्यम है। चाहे वह चित्रकला हो, संगीत हो, नृत्य हो या साहित्य, जब कोई कलाकार अपनी कला का सृजन करता है, तो वह एक अलग ही दुनिया में खो जाता है। उस समय उसे जो मानसिक शांति और आनंद मिलता है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता (अवर्णनीय)।
यही आनंद उस कला को देखने या सुनने वाले दर्शकों को भी मिलता है। एक सुंदर पेंटिंग या एक मधुर गीत हमारे मन के सारे तनाव को दूर कर देता है। कला जीवन को रंगीन और सकारात्मक बनाती है। इसलिए यह सत्य है कि कला से मिलने वाली खुशी और आनंद की कोई सीमा नहीं होती।
इस संस्मरण को पढ़कर मैंने समझा कि एक सच्चा और महान कलाकार वही होता है जो अपनी कला के साथ-साथ इंसानियत और प्रेम को भी महत्त्व देता है। प्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रजा साहब सर्वधर्मसमभाव में विश्वास रखते थे और हर छोटे-बड़े काम को पूरी लगन और तन्मयता से करते थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, उसे हमेशा जमीन से जुड़ा रहना चाहिए और दूसरों का आदर करना चाहिए।