५. बसंत गीत
चंद्रप्रकाश 'चंद्र' रचित कविता 'बसंत गीत' का संपूर्ण स्वाध्याय, भावार्थ व शब्दार्थ — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
शेअर करेंAdvertisement
कविता का भावार्थ : इस गीत के माध्यम से कवि चंद्रप्रकाश 'चंद्र' जी ने वसंत ऋतु के आगमन पर प्रकृति में होने वाले सुंदर परिवर्तनों और उल्लास का वर्णन किया है। वसंत ऋतु आ गई है, इसलिए सब मिलकर खुशी के गीत गाओ। कलियाँ क्रीड़ा (कलोल) कर रही हैं और फूल धीरे-धीरे मुसकरा रहे हैं। भँवरे गुन-गुन करके फूलों का रस (मकरंद) चुरा रहे हैं। जंगलों और बाग-बगीचों में मनमोहक सुगंध उड़ रही है। मोर ठुमक-ठुमक कर नाच रहे हैं और कोयल मीठे गीत गा रही है। खेतों में पीली-पीली सरसों खिल गई है और आम के पेड़ों पर बौर (फूल) छा गए हैं। ऐसा लगता है मानो हरी मटर के बिछौने पर प्रकृति ने अनगिनत रंग बरसा दिए हों। सचमुच, वसंत ऋतु बहुत सजी-धजी और सुहानी लग रही है।
शब्दार्थ व ध्वन्यात्मक शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कलोल | क्रीड़ा, खेल |
| कुसुम | फूल, पुष्प |
| मधुप | भँवरा |
| मकरंद | फूलों का रस (पराग) |
| सुहनि | सुहानी, सुखद |
| मयूरा | मोर |
| अरु | और |
| बौर | आम के पेड़ पर आने वाले फूल |
| अमवा | आम का पेड़ |
| अमित | असीमित, बहुत अधिक |
कविता में अनेक ऐसे शब्द आए हैं जो जोड़े में हैं और जिनसे एक विशेष ध्वनि या लय का निर्माण होता है। वे शब्द निम्नलिखित हैं :
Advertisement
अन्य कृतियाँ एवं चर्चा
हमारे देश में मुख्य रूप से तीन मौसम होते हैं— सर्दी, गर्मी और बरसात। इन तीनों के अलावा वसंत ऋतु भी आती है, जिसे 'ऋतुओं का राजा' कहा जाता है। मौसम के अनुसार प्रकृति में ये परिवर्तन होते हैं :
- सर्दी (Winter) : इस मौसम में कड़ाके की ठंड पड़ती है। कुछ पेड़ों के पत्ते पीले होकर झड़ने लगते हैं। दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं।
- वसंत (Spring) : यह सर्दी के बाद आता है। इस समय ठंड कम हो जाती है। पेड़ों पर नई हरी पत्तियाँ और रंग-बिरंगे फूल आने लगते हैं। कोयल गाती है और खेत सरसों के पीले फूलों से भर जाते हैं। प्रकृति सबसे सुंदर दिखाई देती है।
- गर्मी (Summer) : इस मौसम में तेज धूप निकलती है। नदियाँ और तालाब सूखने लगते हैं। पेड़ों पर रसीले फल (जैसे- आम, तरबूज) पकने लगते हैं।
- बरसात (Monsoon) : आसमान में काले बादल छा जाते हैं और बारिश होती है। सूखी धरती फिर से हरी-भरी हो जाती है। चारों ओर हरियाली छा जाती है और मोर पंख फैलाकर नाचने लगते हैं।
(क) वसंत ऋतु आने पर भँवरे क्या करते हैं ?
वसंत ऋतु आने पर भँवरे गुन-गुन करते हुए फूलों का रस (मकरंद) चुराते हैं।
(ख) बाग-बगीचों में क्या उड़ रही है ?
बाग-बगीचों और वनों में मनमोहक और सुहानी सुगंध उड़ रही है।
(ग) वसंत ऋतु में कौन नाचता है और कौन गाता है ?
वसंत ऋतु में मोर (मयूरा) ठुमक-ठुमक कर नाचते हैं और कोयल मीठे गीत गाती है।
(घ) खेतों में कौन-सी फसल फूली हुई है ?
खेतों में पीली-पीली सरसों की फसल फूली हुई है और हरी मटर के बिछौने छा गए हैं।
कक्षा में करने योग्य कृति
१. सस्वर गायन : विद्यार्थियों का गुट बनाकर उचित लय-ताल और हाव-भाव के साथ 'बसंत गीत' का सामूहिक गायन करवाएँ।
२. चित्रकला : विद्यार्थियों को वसंत ऋतु, पीली सरसों, मोर और आम के पेड़ का सुंदर चित्र बनाने के लिए प्रेरित करें।