३. कठपुतली
कहानी का सारांश, विशेषणयुक्त शब्द व विशेषण के भेद, उपसर्ग, संज्ञा-सर्वनाम प्रयोग, सही विकल्प तथा अंधश्रद्धा के कारण व उपाय. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).
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पाठ के बारे में
‘कठपुतली’ कहानी में आनंद महोत्सव के कठपुतली कार्यक्रम का वर्णन है। सूत्रधार अंधविश्वासों के पीछे का सच बताता है। यह कहानी वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और अंधविश्वास से दूर रहने का संदेश देती है। सूचना है — ‘पढ़ो, समझो और लिखो’।
मुख्य बिंदु
- नारियल से फूल निकलना चमत्कार नहीं, हाथ की सफाई है।
- काली बिल्ली चूहा पकड़ने दौड़ी थी, उसने रास्ता नहीं काटा।
- मिर्ची की गंध से छींक आती है, यह अपशकुन नहीं।
- हर घटना के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण होता है।
- व्याकरण : विशेषण के भेद और उपसर्ग।
शब्दार्थ
- सूत्रधार – कार्यक्रम का संचालन करनेवाला
- ठिठकना – सहसा रुकना
- कुप्रथा – बुरी रीति
- अंधश्रद्धा – बिना सोचे-समझे किया गया विश्वास
ध्यान दें : कहानी का मूल गद्यांश यहाँ नहीं दिया गया है — वह प्रकाशित पाठ्यपुस्तक से ही पढ़ें। यहाँ कहानी का सारांश अपने शब्दों में तथा सभी कृतियों के उत्तर दिए गए हैं।
कहानी का सारांश
शहर में ‘आनंद महोत्सव’ लगा था। वहाँ अलग-अलग राज्यों की शिल्पकला की दुकानें थीं। झूले, खेल, कठपुतली नृत्य और खाने-पीने की दुकानें भी थीं। प्रीति अपने मित्र तेजस, प्रसन्ना और मृण्मयी के साथ महोत्सव देखने आई थी।
कठपुतली नृत्य की दुकान के पास एक बोर्ड था। उस पर लिखा था — जो हमें गलत साबित करे, वह हजार रुपए ले जाए। प्रीति मित्रों के साथ भीतर चली गई।
भीतर रंग-बिरंगी कठपुतलियाँ लोगों का स्वागत कर रही थीं। एक कठपुतली नारियल लेकर आई। उसने नारियल जमीन पर पटका, तो उसमें से फूल निकले। सूत्रधार ने बताया कि यह हाथ की सफाई है। नारियल के एक छेद से उसमें कलियाँ डाल दी जाती हैं। समय पर वे खिलकर फूल बन जाती हैं। लोग इसे चमत्कार समझ बैठते हैं।
फिर एक काली बिल्ली सामने से भागी। सारी कठपुतलियाँ ठिठककर खड़ी हो गईं। सूत्रधार ने समझाया कि बिल्ली को चूहा दिखा था। वह उसे पकड़ने दौड़ी थी। उसने जान-बूझकर किसी का रास्ता नहीं काटा।
फिर एक कठपुतली छींकती हुई आई। सब डर गईं कि अपशकुन हो गया। सूत्रधार ने बताया कि पास की चक्की पर मिर्ची पिस रही है। इसलिए उस गली से आनेवाला हर व्यक्ति छींक रहा है।
सूत्रधार ने समझाया कि हर घटना के पीछे कोई-न-कोई कारण होता है। शकुन-अपशकुन के कारण हम काम टालते हैं। इससे काम का उचित फल नहीं मिलता। अंत में कठपुतलियों ने गाया कि विज्ञान ने अंधश्रद्धा भगा दी है। प्रीति ने तय किया कि वह घर जाकर बुआ से कहेगी — ‘‘विश्वास करो, अंधविश्वास नहीं।’’
विशेषता हमारी — चित्र देखकर विशेषणयुक्त शब्द बताओ
जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है, उसे विशेषण कहते हैं।
- काली मछली — तालाब में एक काली मछली तैर रही है।
- लाल गुलाब — बगीचे में लाल गुलाब खिला है।
- थोड़ा नमक — सब्जी में थोड़ा नमक डालो।
- एक लीटर दूध — माँ ने एक लीटर दूध मँगवाया।
- पहला, दूसरा, तीसरा — दौड़ में मेरा मित्र पहला आया।
- दस कलमें — मेरे पास दस कलमें हैं।
- यह पुस्तक — यह पुस्तक बहुत रोचक है।
- हरा पेड़ — टीले पर एक हरा पेड़ खड़ा है।
आओ, विशेषण के भेद समझें
कहानी में आए विशेषण — काली, बहुत, एक, ये। विशेषण के चार भेद हैं —
- गुणवाचक — रंग, रूप, गुण या दशा बताता है। जैसे — काली बिल्ली, लाल गुलाब।
- परिमाणवाचक — नाप-तौल की मात्रा बताता है। जैसे — थोड़ा नमक, एक लीटर दूध।
- संख्यावाचक — गिनती या क्रम बताता है। जैसे — दस कलमें, पहला।
- सार्वनामिक — सर्वनाम संज्ञा से पहले आकर संकेत करता है। जैसे — ये कठपुतलियाँ, यह पुस्तक।
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सही विकल्प चुनकर वाक्य फिर से लिखो
शब्द वाटिका
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| आजमाना | उपयोग अथवा प्रयोग करके देखना |
| असर | परिणाम |
| ठिठकना | सहसा रुकना |
| सूत्रधार | नाटक या कार्यक्रम का संचालन करनेवाला |
| अंधश्रद्धा | बिना सोचे-समझे किया जानेवाला विश्वास |
| कुप्रथा | बुरी रीति |
| अपूर्णता | अधूरापन |
| शकुन-अपशकुन | शुभ और अशुभ माने जानेवाले संकेत |
मुहावरा :
भाषा की ओर
शब्द के आरंभ में लगकर उसका अर्थ बदलनेवाले शब्दांश को उपसर्ग कहते हैं। दिए गए उपसर्ग — अप, नि, सु, अ, कु, भर।
और उदाहरण : अ + ज्ञान = अज्ञान; कु + मार्ग = कुमार्ग; सु + गंध = सुगंध; अप + यश = अपयश; भर + पेट = भरपेट।
नीचे दी गई संज्ञाओं का वाक्यों में प्रयोग करो
टीप : ये वाक्य केवल नमूना हैं। अपने वाक्य स्वयं बनाओ।
सर्वनामों के चित्र देखो, पहचानो और वाक्यों में प्रयोग करो
दिए गए सर्वनाम — तुम, कोई, हम, आप
- चश्मा पहने अकेला खड़ा व्यक्ति — आप — आप कृपया यहाँ बैठिए ।
- साथ खड़े दो बच्चे — हम — हम दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते हैं ।
- दरवाजे पर अनजान छाया — कोई — दरवाजे पर कोई खड़ा है ।
- एक-दूसरे की ओर संकेत करते बच्चे — तुम — तुम मेरे साथ खेलने चलोगे ?
टीप : यह चित्र-आधारित कृति है। इसलिए क्रम में थोड़ा अंतर हो सकता है। ‘आप’ आदरसूचक है। ‘कोई’ अनिश्चयवाचक सर्वनाम है।
खोजबीन — अंधश्रद्धा के कारण और उसे दूर करने के उपाय
कारण :
- अशिक्षा और वैज्ञानिक जानकारी की कमी।
- पुरानी परंपराओं को बिना सोचे मान लेना।
- बीमारी, हानि या असफलता का डर।
- घटना के पीछे का असली कारण न जानना।
दूर करने के उपाय :
- हर बात का कारण पूछना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना।
- चमत्कारों के पीछे का रहस्य प्रयोग करके दिखाना।
- कठपुतली नाटक और पथनाट्य से जनजागृति करना।
- बीमारी में झाड़-फूँक के बजाय डॉक्टर के पास जाना।
- शिक्षा का प्रसार करना।
कहानी के तीन अंधविश्वास और उनके पीछे का सच :
- नारियल से फूल निकलना — नारियल में पहले से कलियाँ भरी थीं। यह हाथ की सफाई है।
- काली बिल्ली का रास्ता काटना — बिल्ली चूहा पकड़ने दौड़ी थी।
- छींक आना — पास की चक्की पर मिर्ची पिस रही थी। उसकी गंध से सब छींक रहे थे।
अन्य कृतियाँ
यदि मुझे अलादीन का चिराग मिल जाए, तो मैं जिन्न को बुलाऊँगा। पर मैं अपने लिए महल या खिलौने नहीं माँगूँगा।
मैं माँगूँगा कि देश का कोई बच्चा भूखा न सोए। हर बच्चे को पढ़ने के लिए पुस्तकें मिलें। नदियाँ साफ हो जाएँ और हर गाँव में हरे पेड़ हों।
मैं यह भी माँगूँगा कि लोगों के मन से अंधविश्वास दूर हो जाए। फिर मैं चिराग लौटा दूँगा।
टीप : यह कल्पनात्मक प्रश्न है। अपनी कल्पना से अलग उत्तर भी लिखा जा सकता है।
- हिचकी — जल्दी-जल्दी खाने या पीने से श्वासपटल अचानक सिकुड़ जाता है।
- छींक — नाक में धूल या तीखी गंध जाने पर छींक आती है।
- जँभाई — थकान या नींद आने पर जँभाई आती है।
- खाँसी — गले में कुछ अटकने या संक्रमण होने पर खाँसी आती है।
- पसीना — शरीर को ठंडा रखने के लिए पसीना आता है।
- पलक झपकना — इससे आँखें नम और साफ रहती हैं।
ध्यान दो : ये सब शरीर की स्वाभाविक क्रियाएँ हैं। इनका शकुन-अपशकुन से कोई संबंध नहीं है।
कैसे बनाओ : पुराना मोजा, कपड़े के टुकड़े, गत्ता, ऊन, बटन और धागा लो। मोजे को हाथ पर चढ़ाओ। बटन से आँखें और ऊन से बाल बनाओ। रंगीन कपड़े से पहनावा बनाओ।
मंचन कैसे करो : मेज पर पर्दा टाँगकर मंच बनाओ। पीछे बैठकर कठपुतली हिलाओ और संवाद बोलो। संवाद छोटे और मजेदार रखो। अंत में कोई सीख दो।
सुनो तो जरा : चुटकुले और पहेलियाँ सुनो और किसी कार्यक्रम में सुनाओ। हाव-भाव और आवाज के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखो।
बताओ तो सही : कोई संस्मरणीय घटना बताओ — जैसे कोई यात्रा या प्रतियोगिता। घटना क्रम से बताओ और अंत में उससे मिली सीख बताओ।
वाचन जगत से : हितोपदेश की कोई कहानी पढ़ो और उससे संबंधित चित्र बनाओ।
अध्ययन कौशल : पाठ के नए शब्द शब्दकोश में ढूँढ़कर वर्णक्रम से लिखो — अंधश्रद्धा, अपूर्णता, असर, आजमाना, कुप्रथा, ठिठकना, शकुन, सूत्रधार।
विचार मंथन व सदैव ध्यान में रखो
दीपक जलते ही अँधेरा भाग जाता है। वैसे ही विज्ञान का प्रकाश पहुँचते ही अंधविश्वास दूर हो जाता है। इसलिए किसी बात को सुनते ही मत मानो। पहले सोचो — ‘ऐसा क्यों होता है?’ बड़ों से पूछो और पुस्तकों में देखो। प्रीति की तरह हम भी कहें — ‘‘विश्वास करो, अंधविश्वास नहीं।’’
मैंने समझा
इस कहानी से मैंने समझा कि हर घटना के पीछे कोई कारण होता है। नारियल से फूल निकलना, बिल्ली का रास्ता काटना या छींक आना — इनमें कोई चमत्कार या अपशकुन नहीं था।
शकुन-अपशकुन के नाम पर काम टालने से हमारा ही नुकसान होता है। अब मैं किसी बात को बिना सोचे नहीं मानूँगा। मैं दूसरों को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहूँगा।
टीप : ‘मैंने समझा’ में विद्यार्थी को स्वयं के शब्दों में लिखना अपेक्षित है। ऊपर दिया गया उत्तर केवल नमूना है।