६. गिरिधर नागर
कवयित्री — संत मीराबाई | संपूर्ण स्वाध्याय, अपठित पद्यांश, भाषा बिंदु और उपयोजित लेखन — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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कवयित्री परिचय : संत मीराबाई बचपन से ही कृष्णभक्ति में लीन रहा करती थीं। आपके पदों का मुख्य स्वर भगवत प्रेम ही है। प्रस्तुत पदों में मीराबाई की उत्सुकता, मिलन, आशा और प्रतीक्षा के भाव अनुपम रूप से व्यक्त हुए हैं।
स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)
संजाल पूर्ण कीजिए : होली के समय आनंद निर्मित करने वाले घटक
| अर्थ | कविता में प्रयुक्त शब्द |
|---|---|
| (१) दासी | चेरी |
| (२) साजन | पिव |
| (३) बार-बार | बेर-बेर |
| (४) आकाश | अंबर |
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भावार्थ : संत मीराबाई कहती हैं कि हे हरि! आपके बिना मेरा इस संसार में कौन है? अर्थात् आपके सिवा मेरा कोई आश्रय नहीं है। आप ही मेरे पालनहार हैं और मैं आपकी दासी हूँ। मैं दिन-रात आपका ही नाम जपती हूँ और बार-बार आपको पुकारती हूँ, क्योंकि मुझे आपके दर्शनों की तीव्र लालसा है।
यह संसार विकारों का एक अथाह सागर है, जिसमें मैं घिर गई हूँ। मेरी जीवन रूपी नाव टूट गई है और डूबने वाली है। हे प्रभु! जल्दी आकर इसके पाल बाँधिए, अन्यथा यह डूब जाएगी। आपकी यह विरहिणी दासी (मीरा) आपकी राह देख रही है। दासी मीरा सदा राम (प्रभु) का नाम रटती रहती है, अतः आप मुझे अपनी शरण में ले लीजिए!
अपठित पद्यांश
पद्यांश : काम जरा लेकर देखो, सख्त बात से नहीं स्नेह से...
१. किसी से काम करवाने के लिए उपयुक्त — स्नेह (प्यार)
२. हर समय अच्छी लगने वाली बात — प्यार
१. अच्छा प्रयत्न यही है — गिरे हुए को उठाना
२. यही अधोगति है — प्यार देकर जिसे उठाया न जा सके (दे प्यार उठा पाए न जिसे)
संदेश : कवि भवानी प्रसाद मिश्र जी कहते हैं कि प्रेम और स्नेह में असीम शक्ति होती है। चाहे खाई कितनी भी गहरी क्यों न हो (अर्थात कठिनाइयाँ कितनी भी बड़ी हों) या समाज कितना भी भ्रष्ट क्यों न हो जाए, सच्चा प्यार हर जगह पहुँच सकता है और हर किसी के हृदय को जीतकर सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
भाषा बिंदु (व्याकरण)
| कारक चिह्न | कारक का नाम | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| ने | कर्ता कारक | राम ने रावण को मारा। |
| को | कर्म कारक | माँ ने बच्चे को बुलाया। |
| से | करण कारक | वह कलम से पत्र लिखता है। |
| का | संबंध कारक | यह रमेश का घर है। |
| की | संबंध कारक | वह श्याम की बहन है। |
| के | संबंध कारक | मेरे घर के सामने एक सुंदर पेड़ है। |
| में | अधिकरण कारक | गिलास में पानी भरा है। |
| पर | अधिकरण कारक | मेज पर पुस्तकें रखी हैं। |
| हे | संबोधन कारक | हे भगवान! हम सबकी रक्षा करो। |
| अरे | संबोधन कारक | अरे! तुम यहाँ कब आए? |
| के लिए | संप्रदान कारक | पिताजी बच्चों के लिए खिलौने लाए। |
उपयोजित लेखन
शीर्षक : नटखट गिलहरी और बच्चा
गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थीं। रोहन नाम का एक छोटा बच्चा अपने घर के आँगन में खेल रहा था। उसकी माँ ने घर में ढेर सारे चावल के पापड़ बनाए थे और उन्हें सूखने के बाद कमरे की एक पुरानी लकड़ी की अलमारी के ऊपर सुरक्षित रख दिया था ताकि कोई उन्हें जूठा न कर सके।
रोहन के घर के पास एक बड़ा सा अमरूद का पेड़ था, जहाँ से एक नटखट गिलहरी अक्सर उनकी खिड़की पर आती थी। उस दिन गिलहरी को बहुत भूख लगी थी। खिड़की से अंदर आते ही उसकी नज़र अलमारी के ऊपर रखे चावल के पापड़ों पर पड़ी। वह झटपट अलमारी पर चढ़ गई और अपने छोटे-छोटे हाथों से पापड़ पकड़कर कुटुर-कुटुर खाने लगी।
छोटा बच्चा रोहन कमरे में आया तो उसने यह नज़ारा देखा। वह गिलहरी को भगाने के बजाय खुशी से ताली बजाने लगा। गिलहरी ने भी निडर होकर उसकी तरफ देखा और एक और पापड़ उठाकर खिड़की से बाहर पेड़ पर भाग गई। रोहन की हँसी सुनकर माँ अंदर आईं और सारा माजरा समझकर वे भी मुस्कुरा उठीं। उस दिन से गिलहरी और उस छोटे बच्चे के बीच एक अनूठी दोस्ती हो गई।
सीख : पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम और करुणा का भाव रखना चाहिए।