४. मन (पूरक पठन)
कवि — विकास परिहार | संपूर्ण स्वाध्याय, पद्य विश्लेषण और उपयोजित लेखन — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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कवि परिचय : विकास परिहार जी ने प्रस्तुत हाइकु (जापानी काव्य विधा) में अपने अनुभवों और छोटी-छोटी विभिन्न घटनाओं को अर्थवाही सीमित शब्दों में प्रस्तुत किया है।
सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए
| 'अ' समूह | 'आ' समूह (सही उत्तर) |
|---|---|
| १. मछली | प्यासी |
| २. गीतों के स्वर | अमर |
| ३. सूना | आकाश |
| ४. पटरियाँ रेल की | मौन |
१. सितारों का छिपना
परिणाम : आकाश का सूना हो जाना।
२. तुम्हारा गीतों को स्वर देना
परिणाम : गीतों के स्वर का अमर हो जाना।
भावार्थ : जब व्यक्ति के मन की पीड़ा बहुत अधिक बढ़ जाती है और वह उसे सह नहीं पाता, तब वह पीड़ा बादल बनकर आँखों से आँसुओं के रूप में बरसने लगती है। अर्थात् रोने से मन का दुख और निराशा आँसुओं के रूप में बाहर निकल जाते हैं, जिससे मन हल्का हो जाता है।
स्वाध्याय
१. करते जाओ पाने की मत सोचो जीवन सारा
संदेश : हमें फल की अपेक्षा या चिंता किए बिना जीवन भर अपना कर्म करते रहना चाहिए।
२. भीतरी कुंठा नयनों के द्वार से आई बाहर
संदेश : जब हम रोते हैं, तो मन का दुख और गहरी निराशा (कुंठा) आँसुओं के रूप में बाहर निकल जाती है, जिससे मन को शांति मिलती है।
- महीना : फागुन
- ऋतु : वसंत ऋतु
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- मंझधार में डोले — जीवन नैया
- छिपे हुए — सितारे
- धुल गए — विषाद
- अमर हुए — गीतों के स्वर
केंद्रीय भाव : रेल की पटरियाँ अनंत काल तक एक साथ चलती हैं, लेकिन वे आपस में कभी नहीं मिलतीं और हमेशा मौन रहती हैं। इसी प्रकार, कवि यह समझाना चाहते हैं कि मानव जीवन में भी सुख और दुख दो पटरियों के समान हैं। वे हमेशा मनुष्य के साथ-साथ चलते हैं, पर वे कभी एक नहीं हो सकते। जीवन में इनका आना-जाना निरंतर चलता रहता है।
उपयोजित लेखन
दिनांक : १५ अगस्त २०२४
संबोधन : प्रिय मित्र राहुल,
अभिवादन : सप्रेम नमस्ते।
प्रारंभ : मैं यहाँ कुशल-मंगल हूँ और आशा करता हूँ कि तुम भी वहाँ सपरिवार सकुशल होगे। कल ही मुझे तुम्हारा भेजा हुआ पत्र मिला।
विषय विवेचन : तुम्हारा पत्र पढ़कर बहुत खुशी हुई कि तुमने मुझे अंतर-विद्यालयीन वक्तृत्व प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर बधाई दी है। तुम्हारी शुभकामनाओं और स्नेह भरे शब्दों के लिए मैं तुम्हें हृदय से धन्यवाद देता हूँ। तुम्हारी प्रेरणा और प्रोत्साहन ने हमेशा मेरा मनोबल बढ़ाया है, जिसके कारण ही मैं यह सफलता प्राप्त कर सका। भविष्य में भी मैं ऐसे ही प्रयास करता रहूँगा। घर में माताजी और पिताजी को मेरा प्रणाम कहना तथा छोटी बहन को स्नेह।
तुम्हारा/तुम्हारी : तुम्हारा मित्र,
नाम : अ. ब. क.
पता : १०१, राम निवास, तिलक नगर, पुणे - ४११०३८
ई-मेल आईडी : abc@email.com