४. छापा
कवि — ओमप्रकाश 'आदित्य' | संपूर्ण स्वाध्याय, भावार्थ, अभिव्यक्ति और उपयोजित लेखन — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।
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कवि परिचय : ओमप्रकाश 'आदित्य' जी द्वारा रचित हास्य-व्यंग्य कविता 'छापा' में आयकर विभाग के छापे के माध्यम से एक आम आदमी की दयनीय आर्थिक स्थिति और व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया गया है।
स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)
- समृद्ध : जिनके घर में सोने-चाँदी के पलंग और सोफे हैं।
- अभावग्रस्त : पर जिनके घर में बैठने को कुछ भी नहीं।
भावार्थ : कविता की अंतिम पंक्तियों में कवि आयकर अधिकारियों (छापामारों) पर करारा व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि जिन अमीर लोगों के घरों में अवैध रूप से अर्जित संपत्ति, सोने-चाँदी के पलंग और मँहगे सोफे होते हैं, आप उन्हें निकाल कर ले जाते हैं—यह बहुत अच्छी बात है, ऐसा होना ही चाहिए। परंतु हम जैसे गरीब और ईमानदार लोग, जिनके घर में बैठने के लिए एक साधारण कुर्सी तक नहीं है, कम-से-कम उनके घरों में सहानुभूति के रूप में एक लकड़ी का तख्त तो डलवा दीजिए। अर्थात् सरकार को भ्रष्टाचारियों से धन लेकर गरीबों की बुनियादी जरूरतें पूरी करनी चाहिए।
१. कवि द्वारा छापामारों को दिए गए सुझाव —
जिनके घर में बैठने को कुछ भी नहीं है, उनके यहाँ कम-से-कम एक तख्त डलवा दीजिए।
२. शयनकक्ष में पाई गई चीजें —
फटा हुआ तकिया, टूटी अलमारी।
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| 'अ' समूह | 'आ' समूह (सही उत्तर) |
|---|---|
| १. अर्थ | नई कविता में |
| २. सुवर्ण | काव्य कृतियों में |
| ३. चाँदी | बालों में |
| ४. मुद्रा | चेहरे पर |
- अरण्यकांड : कवि के घर की दयनीय स्थिति देखकर छापामारों को क्या दिखाई दिया?
- तख्त : कवि ने छापामारों से अपने घर में क्या डलवाने के लिए कहा?
- असफलता : घर में कुछ न मिलने पर छापामार मन-ही-मन किस बात पर पछताने लगे?
- अनधिकृत : छापामारों को कवि द्वारा किस रूप से अर्जित किया हुआ अर्थ (धन) चाहिए था?
| शब्द | सामान्य अर्थ (छापामारों के अनुसार) | कविता के आधार पर (कवि के अनुसार) |
|---|---|---|
| सोना | स्वर्ण / एक कीमती धातु (Gold) | नींद / सोने की क्रिया (Sleep) |
| चाँदी | एक कीमती सफेद धातु (Silver) | सफेद बाल (कवि के बालों में आ रही सफेदी) |
| अर्थ | धन / संपत्ति (Wealth / Money) | कविताओं का मतलब / भावार्थ (Meaning) |
| मुद्रा | रुपये-पैसे / सिक्के (Currency / Coins) | चेहरे के भाव / मुख-मुद्रा (Facial expressions) |
अभिव्यक्ति
कर (Tax) किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। सरकार को देश की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए भारी धन की आवश्यकता होती है, जो नागरिकों द्वारा चुकाए गए करों से ही प्राप्त होता है। जब नागरिक ईमानदारी से अपना आयकर, संपत्ति कर और अन्य कर चुकाते हैं, तो सरकार के पास जन-कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए पर्याप्त संसाधन होते हैं।
यदि लोग कर चोरी करते हैं, तो देश के विकास की गति धीमी हो जाती है और इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है। ईमानदारी से कर जमा करना केवल एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देश के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य भी है। राष्ट्र के चहुँमुखी विकास और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रत्येक सक्षम नागरिक को समय पर कर जमा करना चाहिए, क्योंकि कर का पैसा अंततः हमारे ही विकास और सुरक्षा में काम आता है।
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