कक्षा १० हिंदी · पहली इकाई

११. कृषक गान

कवि — दिनेश भारद्वाज | संपूर्ण स्वाध्याय, पद्य विश्लेषण, और भावार्थ — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।

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कवि परिचय : दिनेश भारद्वाज जी द्वारा रचित प्रस्तुत गीत 'कृषक गान' कृषक (किसान) के कठिन जीवन पर आधारित है। अन्नदाता कृषक की दुर्दशा का वर्णन करते हुए कवि उसका महत्त्व और सम्मान पुनः स्थापित करना चाहते हैं।

स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)

१सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
संजाल पूर्ण कीजिए : कवि की चाह
कृषक पर मान (गर्व) करना कृषक का गान करना (गीत गाना) कृषक का आह्वान करना कृषक के साथ नव सृष्टि का निर्माण करना
२कृतियाँ पूर्ण कीजिए :

१. कृषक इन स्थितियों में अविचल रहता है :

  • १. जब पूरी दुनिया में मधुमास (वसंत) होता है, तब भी उसके जीवन में पतझड़ रहता है।
  • २. वह दूसरों का पालक (विश्व का पालक) होने पर भी स्वयं पददलित और शोषित होकर मर रहा है।

२. कविता में प्रयुक्त ऋतुओं के नाम :
१. मधुमास (वसंत ऋतु)
२. पतझर (पतझड़)

३वाक्य पूर्ण कीजिए :
  1. कृषक कमजोर शरीर को — पत्तियों से पालता है।
  2. कृषक बंजर जमीन को — अपने खून से उर्वरा (उपजाऊ) कर डालता है।
४निम्नलिखित पंक्तियों में कवि के मन में कृषक के प्रति जागृत होने वाले भाव लिखिए :
पंक्तिभाव
१. आज उसपर मान कर लूँगर्व या अभिमान का भाव
२. आह्वान उसका आज कर लूँप्रेरित करने या साथ जुड़ने का भाव
३. नव सृष्टि का निर्माण कर लूँसृजनशीलता या नवनिर्माण का भाव
४. आज उसका ध्यान कर लूँश्रद्धा या सम्मान का भाव

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५कविता में आए इन शब्दों के लिए प्रयुक्त शब्द हैं :
१. निर्माता → सृजक २. शरीर → तन ३. राक्षस → असुर ४. मानव → मनुज
६कविता की प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए । (हाथ में संतोष की... गान कर लूँ)

भावार्थ : कवि कहते हैं कि किसान के पास भले ही सुख-सुविधाओं का अभाव हो, लेकिन वह 'संतोष' रूपी अस्त्र धारण करके अपने जीवन संघर्षों का डटकर सामना कर रहा है। पूरी दुनिया जब वसंत ऋतु (मधुमास) की खुशियाँ मना रही होती है, तब भी किसान का जीवन पतझड़ के समान नीरस और दुखों से भरा रहता है। इतनी कठिनाइयों के बावजूद वह अपनी गरीबी (दीनता) को ही अपना अभिमान मानता है। कवि ऐसे संतोषी, परिश्रमी और स्वाभिमानी किसान पर गर्व करना चाहते हैं और उसी के सम्मान में गीत गाना चाहते हैं।

७निम्न मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए :
१. रचनाकार कवि का नामदिनेश भारद्वाज
२. रचना का प्रकारगीत (कविता)
३. पसंदीदा पंक्ति"विश्व का पालक बन जो, अमर उसको कर रहा है,
किंतु अपने पालितों के, पद दलित हो मर रहा है,"
४. पसंदीदा होने का कारणइन पंक्तियों में किसान की वास्तविकता और समाज की कृतघ्नता का सजीव चित्रण हुआ है। जो किसान पूरी दुनिया का पेट भरता है, विडंबना यह है कि वही किसान समाज द्वारा शोषित और उपेक्षित है।
५. रचना से प्राप्त प्रेरणाइस कविता से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें अन्नदाता किसान के कठिन परिश्रम, त्याग और उसकी दीनता का उपहास नहीं करना चाहिए। समाज को किसान का सम्मान करना चाहिए और उसके अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा उसके साथ खड़ा रहना चाहिए।