13. पेड़ की बात
जगदीशचंद्र बसु के निबंध ‘पेड़ की बात’ के सभी अभ्यास, ‘आओ बच्चो तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिंदुस्तान की’ का भाव, कठिन शब्दों के अर्थ और पहेलियों के उत्तर। NCERT मल्हार, कक्षा 6.
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इस पृष्ठ पर निबंध ‘पेड़ की बात’ के सभी प्रश्नों के उत्तर, प्रवाह चार्ट और शब्द सीढ़ी के उत्तर दिए गए हैं। साथ ही गीत ‘आओ बच्चो तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिंदुस्तान की’ का भाव, पुस्तक के कठिन शब्दों के अर्थ और सभी पाठों की पहेलियों के उत्तर भी दिए गए हैं। खुले प्रश्नों के उत्तर नमूने के रूप में दिए गए हैं।
पाठ का सार : यह निबंध प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु का है। बांग्ला से हिंदी में इसका अनुवाद शंकर सेन ने किया है। वर्षा का पानी पाकर मिट्टी में पड़ा बीज अंकुरित होता है। अंकुर का नीचे जाने वाला भाग जड़ और ऊपर उठने वाला भाग तना कहलाता है। पेड़ जड़ों से मिट्टी का रस पीते हैं और पत्तों से हवा से आहार लेते हैं। वे सूर्य के प्रकाश की सहायता से ज़हरीली ‘अंगारक’ वायु को शुद्ध कर देते हैं। प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है। फूल खिलने पर पेड़ मधुमक्खियों और तितलियों को बुलाते हैं। वे पराग-कण एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाती हैं, तब बीज बनता है। पेड़ अपना सारा रस देकर बीजों को पालता है और अंत में संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देता है।
पाठ से — मेरी समझ से
(1) “जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो” पौधे को कौन-सा भेद पता लग गया? — उसे उल्टा लटकाया गया है। ★
(2) पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं? — हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं। ★
- गमले को औंधा लटकाने पर पौधे का सिर नीचे और जड़ ऊपर हो गई थी। दो-एक दिन में पत्तियाँ और डालियाँ ऊपर उठ आईं। जड़ घूमकर नीचे लटक गई। मानो पौधा समझ गया कि उसे उल्टा लटकाया गया है।
- साँस छोड़ने पर निकलने वाली ‘अंगारक’ वायु जीवों के लिए ज़हर है। पेड़-पौधे उसी को ग्रहण करके हवा को शुद्ध कर देते हैं। इस तरह वे जीव-जंतुओं के मित्र हैं।
पंक्तियों पर चर्चा
पेड़-पौधे सूर्य के प्रकाश से ही बढ़ते हैं। इसलिए सूर्य की ऊर्जा उनके हर रेशे में बँधी रहती है। लकड़ी जैसे ईंधन को जलाने पर जो रोशनी और गर्मी निकलती है, वह यही बँधी हुई सूर्य की ऊर्जा है।
पेड़ों और मधुमक्खी-तितली की दोस्ती बहुत पुरानी है। ये झुंड बनाकर फूलों पर आती हैं और उनका मधु पीती हैं। बदले में ये पराग-कण एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाती हैं। इससे बीज बनते हैं। इस तरह दोनों एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
मिलकर करें मिलान
| वाक्यांश | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. बीज का ढक्कन दरक गया | बीज के दोनों दलों में दरार आ गई या फट गए। |
| 2. उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैं | साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु-कार्बन डाईऑक्साइड। |
| 3. पत्ते सूर्य ऊर्जा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं | सूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं। |
| 4. प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है | जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधारशक्ति या महत्वपूर्ण है। |
| 5. जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा हो | अपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट। |
| 6. इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैं | मटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं। |
सोच-विचार के लिए
बीज के अंकुरित होने में मिट्टी, वर्षा का पानी, ऋतु (सर्दी के बाद वसंत और फिर वर्षा) और सूरज की रोशनी का सहयोग मिलता है। बीज मिट्टी के नीचे पड़ा रहता है। वर्षा का पानी मिलते ही उसका ढक्कन दरक जाता है और अंकुर बाहर निकल आता है।
- पौधों के दाँत नहीं होते। वे केवल तरल द्रव्य या वायु से भोजन लेते हैं।
- मिट्टी में पानी डालने पर उसमें बहुत-से द्रव्य घुल जाते हैं। पौधे जड़ों से यही रस सोखते हैं।
- पेड़ में हज़ारों नल होते हैं। इन्हीं नलों से रस पूरे पेड़ में पहुँचता है।
- पत्तों में अनगिनत छोटे-छोटे मुँह होते हैं। इनसे पत्ते हवा से आहार लेते हैं।
- सूर्य का प्रकाश पड़ने पर पत्ते ‘अंगारक’ वायु से अंगार अलग कर लेते हैं। यही अंगार पेड़ के शरीर को बढ़ाता है।
लेख की रचना
गेहूँ की बात
सर्दी शुरू होते ही किसान खेत जोतकर गेहूँ के बीज बोता है। नमी पाकर कुछ ही दिनों में बीज से नन्हे हरे अंकुर निकल आते हैं। धीरे-धीरे पूरा खेत हरी चादर जैसा दिखने लगता है। किसान समय-समय पर पानी देता है। गेहूँ के पौधे धूप और पानी पाकर बढ़ते हैं। फिर उन पर बालियाँ आती हैं।
गर्मी आने तक बालियाँ पककर सुनहरी हो जाती हैं। हवा चलने पर पूरा खेत लहराने लगता है। किसान फसल काटकर दाने निकालता है। इन्हीं दानों से आटा बनता है और हमारी रोटी बनती है। कुछ दाने अगले साल बोने के लिए बचाकर रखे जाते हैं। इस तरह गेहूँ का एक दाना हमारा पेट भी भरता है और नई फसल भी देता है।
(ख) अपना लेख कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए। (कक्षा गतिविधि)
अनुमान या कल्पना से
वृक्ष समाप्त होने से पहले अपने बीज छोड़ जाता है। ये बीज मिट्टी में दबे रहते हैं। वर्षा का पानी पाकर इनसे नए अंकुर निकलते हैं। वे बढ़कर नए पेड़ बन जाते हैं। इस तरह पेड़ का जीवन उसकी संतान के रूप में आगे चलता रहता है। गिरा हुआ पेड़ भी लकड़ी के रूप में काम आता है या सड़कर मिट्टी को उपजाऊ बनाता है।
लेखक का बचपन प्रकृति को ध्यान से देखते हुए बीता था। वे पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं से प्रेम करते थे। उन्होंने बीज से अंकुर निकलते और पौधों को प्रकाश की ओर मुड़ते देखा होगा। इन बातों को देखकर उनके मन में प्रश्न उठे होंगे। इन्हीं प्रश्नों के उत्तर खोजते-खोजते उनकी रुचि पेड़-पौधों में जागी होगी।
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प्रवाह चार्ट
बीज → अंकुर → पौधा → पत्ता → कली → फूल → फल → बीज
अंकुरण
- पहला दिन — बीज फूलकर थोड़े बड़े और नरम हो गए।
- दूसरा दिन — बीजों का छिलका फट गया। उनमें से छोटी सफ़ेद जड़ निकली।
- तीसरा दिन — मिट्टी से ऊपर नन्हा अंकुर दिखाई दिया। उसकी लंबाई लगभग 1 सेंटीमीटर थी।
- चौथा दिन — अंकुर लगभग 2–3 सेंटीमीटर का हो गया। उसमें दो छोटे पत्ते निकल आए।
- पात्र खिड़की के पास रखा था। सभी पौधे खिड़की की ओर, यानी प्रकाश की ओर मुड़े हुए थे।
यह नमूना है। अपने पौधों को देखकर ही परिवर्तन लिखिए।
शब्दों के रूप
पेड़ —
सर्दी —
सूर्य —
पाठ से आगे — मेरे प्रिय
| फूल | पक्षी | वृक्ष | पुस्तक | खेल |
|---|---|---|---|---|
| गुलाब | मोर | आम | पंचतंत्र की कहानियाँ | क्रिकेट |
| कमल | तोता | नीम | मल्हार | कबड्डी |
| गेंदा | कोयल | बरगद | अकबर-बीरबल के किस्से | खो-खो |
ये नमूने के उत्तर हैं। आप अपनी पसंद के नाम लिखिए।
आज की पहेली
इस सीढ़ी में हर शब्द पिछले शब्द के अंतिम अक्षर से शुरू होता है, जैसे — रात → तमाम → ममता।
खोजबीन के लिए : इंटरनेट कड़ियों की सहायता से जगदीशचंद्र बसु के बारे में और जानिए-समझिए।
पढ़ने के लिए : आओ बच्चो तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिंदुस्तान की
गीत का भाव : यह देशभक्ति गीत कवि प्रदीप का है। कवि बच्चों को पूरे भारत की झाँकी दिखाते हैं। वे बताते हैं कि उत्तर में हिमालय हमारी रक्षा करता है और दक्षिण में सागर भारत के चरण धोता है। गंगा-यमुना के घाट और देश के हाट-बाज़ारों की शोभा निराली है। फिर कवि राजस्थान की वीरता, महाराणा प्रताप और रानी पद्मिनी के बलिदान को याद करते हैं। महाराष्ट्र में शिवाजी महाराज ने मुगलों से डटकर लोहा लिया था। पंजाब के जलियाँवाला बाग में लोगों ने आज़ादी के लिए गोलियाँ झेलीं। अंत में हरे-भरे बंगाल का वर्णन है, जो नेताजी सुभाष की जन्मभूमि है। कवि कहते हैं कि यह धरती बलिदान की है, इसकी मिट्टी का तिलक करो।
उत्तर में पर्वतराज हिमालय भारत की रखवाली करता है। दक्षिण में सागर भारत के चरणों को धोता है।
गीत में महाराणा प्रताप, रानी पद्मिनी, शिवाजी महाराज और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को याद किया गया है। जलियाँवाला बाग के शहीदों को भी याद किया गया है।
इस धरती की रक्षा और आज़ादी के लिए अनगिनत वीरों ने अपने प्राण दिए हैं। राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब और बंगाल — हर जगह बलिदान की कहानियाँ हैं। इसलिए इसे बलिदान की धरती कहा गया है।
कवि कहना चाहते हैं कि देश की मिट्टी बहुत पवित्र है। हमें इसका आदर करना चाहिए और इस पर गर्व करना चाहिए।
शब्दकोश
पुस्तक के अंत में एक छोटा-सा शब्दकोश दिया गया है। इसमें सभी पाठों में आए कठिन और नए शब्दों के अर्थ दिए गए हैं। यहाँ उनमें से कुछ महत्वपूर्ण शब्द सरल अर्थों के साथ दिए गए हैं।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अंकुर | बीज से निकला नन्हा पौधा |
| अकस्मात | अचानक, एकाएक |
| अचंभित | हैरान, चकित |
| अधीर | जिसमें धीरज न हो, बेचैन |
| अनगिनत | जिसे गिना न जा सके, बहुत सारे |
| अभिलाषा | मन की इच्छा, चाह |
| अमराई | आम के पेड़ों का बाग |
| असबाब | ज़रूरी सामान |
| अस्तबल | घोड़े बाँधने की जगह |
| आघात | चोट, धक्का |
| आच्छादित | ढका हुआ |
| आहिस्ता | धीरे-धीरे |
| क्रीड़ा | खेल-कूद |
| क्षीण | कमज़ोर, घटा हुआ |
| जलज | कमल (जो जल में पैदा हो) |
| जलधर | बादल (जो जल को धारण करे) |
| तरुवर | पेड़, वृक्ष |
| तिमिर | अँधेरा |
| धरा | धरती, पृथ्वी |
| नौसिखिया | जिसने अभी-अभी सीखना शुरू किया हो |
| न्योछावर | किसी के लिए सब कुछ त्याग देना |
| निर्भीक | निडर, जो किसी से न डरे |
| पावस | वर्षा ऋतु, बरसात |
| प्रफुल्लित | बहुत प्रसन्न, खिला हुआ |
| बांधव | सगे-संबंधी, अपने लोग |
| मुल्क | देश |
| वसुंधरा | धरती |
| विषाक्त | ज़हर मिला हुआ, ज़हरीला |
| व्यग्र | बेचैन, घबराया हुआ |
| शर्मिंदा | लज्जित |
| सूक्ष्मदर्शी | बहुत छोटी चीज़ों को बड़ा करके दिखाने वाला यंत्र |
| स्नेह | प्रेम (तेल को भी स्नेह कहते हैं) |
पहेलियों के उत्तर
- शब्दजाल — अलगोजा, बीन, बाँसुरी, सींगी, शहनाई, नादस्वरम, भंकोरा, शंख
- आज की पहेली — हिमालय, गंगा, भारत, कलियाँ, पवन
- शब्द पहेली — नगाड़ा, नयन, जलधर, दूब, अश्रु, अंबर
- आज की पहेली — चना, माचिस
- आज की पहेली — मंगलमयी, प्रत्येक, ग्यारह, धार्मिक, महान, स्वाधीन, दुखभरी, साधारण, छोटी, बड़ा, खूब, मनोहर
- आज की पहेली — पवन, मारुत, वायु, समीर, बयार, अनिल
- आज की पहेली — मूली, नारियल, होंठ, चींटी
- आज की पहेली — खोया, पनीर, मिठाई, छाछ, लस्सी, मक्खन, शरबत, आइसक्रीम
- आज की पहेली — जलज, पतंग, अंधेरा, गुलाबजामुन, मानचित्र
- आज की पहेली — मेरा भारत मेरा गौरव
- आज की पहेली — रात, तमाम, ममता, ताप, पल्लव, वसंत, तना, नाम, मज़बूत, तरल, लटक, कम